अमेरिकी हमले के डर से ईरान की बड़ी किलाबंदी (सोर्स-सोशल मीडिया) 
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अमेरिकी हमले के डर से ईरान की बड़ी किलाबंदी: परमाणु ठिकानों को बनाया 'अदृश्य' बंकर

Iran Nuclear Fortification: ईरान अमेरिकी हमले के डर से अपने परमाणु और सैन्य ठिकानों को कंक्रीट और मिट्टी के नीचे छिपाकर बंकर बना रहा है, ताकि उन्हें किसी भी सैन्य कार्रवाई से बचाया जा सके।

प्रिया सिंह

Iran Military Site Fortification: ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य तनाव अब अपने चरम पर पहुंच चुका है जिससे युद्ध का खतरा बढ़ गया है। सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों को मिट्टी और कंक्रीट से ढक रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह किलाबंदी भविष्य में होने वाले किसी भी अमेरिकी हवाई हमले से बचने के लिए है। इस प्रक्रिया के माध्यम से संवेदनशील स्थलों को अभेद्य बंकरों में तब्दील करने की रणनीतियों पर काम हो रहा है।

परमाणु स्थलों की सुरक्षा

इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी के अनुसार ईरान अपने मुख्य केंद्रों को कंक्रीट के नीचे छिपा रहा है। तालेघन 2 फैसिलिटी को मिट्टी से दबाने का काम पिछले दो से तीन हफ्तों में काफी तेजी से किया गया है। यह केंद्र अब एक 'अदृश्य बंकर' में बदल जाएगा जिस पर किसी भी बाहरी हवाई हमले का कोई असर नहीं होगा।

नतांज और इस्फहान

नतांज न्यूक्लियर प्लांट के पास स्थित कोलांग-गज ला पर्वत के नीचे की सुरंगों को भी अब सख्त किया जा रहा है। सुरंग के प्रवेश द्वारों पर भारी कंक्रीट डाला जा रहा है ताकि हवाई हमलों के प्रभाव को कम किया जा सके। इस्फहान कॉम्प्लेक्स में भी सुरंगों को मिट्टी से भर दिया गया है ताकि जमीन तक पहुंचना पूरी तरह असंभव हो जाए।

सैन्य अड्डों का नवीनीकरण

शिराज मिसाइल बेस पर भी हाल के दिनों में पुनर्निर्माण और सफाई की भारी गतिविधियां देखी गई हैं। तस्वीरों की तुलना से पता चलता है कि बेस के मुख्य लॉजिस्टिक्स और कमांड कंपाउंड को फिर से तैयार किया गया है। पिछले साल के हमलों में इस साइट को मामूली नुकसान हुआ था जिसे अब सुरक्षा के लिहाज से दुरुस्त किया गया है।

युद्ध की भारी आशंका

विशेषज्ञों का दावा है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी समय युद्ध शुरू हो सकता है जो हफ्तों तक चलेगा। व्हाइट हाउस ने सैन्य कार्रवाई की 90 प्रतिशत संभावना जताई है क्योंकि कूटनीतिक वार्ता अब तक सफल नहीं हुई है। क्षेत्र में एफ-22 और एफ-35 जैसे लड़ाकू विमानों की तैनाती ने सुरक्षा संबंधी तनाव को और ज्यादा बढ़ा दिया है।

वैश्विक सुरक्षा चिंताएं

ईरान की इन कोशिशों से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में यूरेनियम संवर्धन जैसी संवेदनशील गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारी मशीनरी और सीमेंट मिक्सर का उपयोग यह दर्शाता है कि यह किलाबंदी बहुत बड़े पैमाने पर की जा रही है। पिकैक्स माउंटेन जैसी फैसिलिटी का भविष्य और ईरान की वास्तविक योजनाएं अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई हैं।

सुरक्षा मानकों में वृद्धि

ईरान अपने जरूरी न्यूक्लियर ठिकानों को तेजी से कंक्रीट और मिट्टी के नीचे छिपाने के काम में जुटा है। विशेषज्ञों के अनुसार अक्टूबर 2024 के बाद से इन ठिकानों के पुनर्निर्माण और सुरक्षा में तेजी आई है। दिसंबर तक आंशिक रूप से ढके ढांचे अब फरवरी 2026 की तस्वीरों में पूरी तरह ओझल हो चुके हैं।

रणनीतिक बंकरों का निर्माण

इमेज इस कोशिश से जुड़ी पूरे कॉम्प्लेक्स में चल रही गतिविधियों जैसे डंप ट्रक और भारी उपकरण दिखाती हैं। सुरंग के प्रवेश द्वारों को वापस भरने से स्पेशल फोर्सेज के लिए जमीन तक पहुंचना काफी मुश्किल हो जाएगा। ईरान की ये कोशिशें सीधे तौर पर हवाई हमलों के खिलाफ अतिरिक्त सुरक्षा कवच तैयार करने के लिए हैं।

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