Iran Diplomacy Qatar Peace Proposal: संयुक्त राष्ट्र की बैठक में पहुंचे ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि तेहरान युद्ध और कूटनीतिक समाधान दोनों विकल्पों के लिए पूरी तरह तैयार है। ईरान ने कतर के मध्यस्थों के जरिए अमेरिका को एक सात सूत्रीय प्रस्ताव भेजा है।
अब तेहरान को इस प्रस्ताव पर वाशिंगटन के अंतिम आधिकारिक जवाब का इंतजार है। अराघची ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन युद्ध चाहता है, जबकि तेहरान शांतिपूर्ण समाधान का पक्षधर है। होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए ईरान ने कुछ न्यायसंगत शर्तें अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने रखी हैं।
संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यक्रमों में भाग लेने न्यूयॉर्क पहुंचे अब्बास अराघची ने पत्रकारों से बात की। उन्होंने बताया कि यात्रा का उद्देश्य दुनिया के सामने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तेहरान का रुख रखना है। ईरान की सरकारी मेहर समाचार एजेंसी ने विदेश मंत्री के इस महत्वपूर्ण बयान को प्रकाशित किया है।
अराघची ने बताया कि कतर के मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका को सात सूत्रीय योजना सौंपी गई है। सोमवार को कतर के एक मध्यस्थ ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल से दोबारा मुलाकात कर चर्चा की।
इस बैठक में ईरान की शर्तों को पूरा करने के व्यावहारिक तरीकों और विकल्पों पर बातचीत हुई। कतरी मध्यस्थ कुछ नए सुझाव लाए थे, जिन्हें अमेरिकी प्रशासन के सामने फिर से रखा जाएगा। इसके बाद अमेरिका का अंतिम आधिकारिक जवाब ईरानी पक्ष को सौंपा जाएगा।
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि वाशिंगटन भले ही शांति का दावा करे, पर असल में वह युद्ध चाहता है। अगर अमेरिका सचमुच कूटनीतिक समाधान चाहता है तो ईरान ने ठोस रास्ता उसके सामने रखा है।
अराघची ने दोहराया कि अमेरिकी दबावों और थोपे गए युद्ध के बावजूद ईरान ने कूटनीति का रास्ता चुना है। ईरान की सात सूत्रीय योजना पूरी तरह तर्कसंगत और अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुकूल है। अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए कुछ अनिवार्य शर्तें हैं।
जब तक वाशिंगटन इन शर्तों को स्वीकार नहीं करता, तब तक जलमार्ग खोलना संभव नहीं है। ईरान का उद्देश्य इन शर्तों को अमेरिका और विश्व समुदाय तक पहुंचाना है। ताकि दुनिया को समझ आए कि तेहरान के पास एक सुव्यवस्थित कूटनीतिक योजना है।
विदेश मंत्री ने कहा कि तेहरान ने शांतिपूर्ण बातचीत के लिए कूटनीति का दरवाजा बंद नहीं किया है। परंतु अगर वाशिंगटन युद्ध थोपता है तो ईरानी सशस्त्र बल हर स्थिति का सामना करने को तैयार हैं।
ईरान अपनी संप्रभुता, अधिकारों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा से पीछे नहीं हटेगा। कतर की मध्यस्थता में चल रही इस कूटनीतिक पहल पर अब अमेरिका के फैसले पर नजरें टिकी हैं। अगर अमेरिकी प्रशासन ईरान के इस सात सूत्रीय प्रस्ताव को स्वीकार करता है तो संकट टल सकता है।
लेकिन अगर वाशिंगटन अड़ियल रवैया अपनाता है तो क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका है। अब्बास अराघची ने कहा कि गेंद अब अमेरिका के पाले में है और उसे ही निर्णय लेना होगा। ईरान अपनी सुरक्षा करते हुए कतर के माध्यम से आने वाले आधिकारिक जवाब का इंतजार कर रहा है।