ईरान में मोसाद एजेंट होने का दावा, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

मात्र 300 डॉलर में खरीदे आतंकवादी? ईरान का MI6 और मोसाद पर बड़ा आरोप, मस्जिदों पर हमले की खौफनाक साजिश बेनकाब

Mossad Agents In Iran: ईरानी सुरक्षा बलों ने ब्रिटिश एजेंसी MI6 और इजरायली मोसाद पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दावा है कि केवल 300 डॉलर देकर स्थानीय अपराधियों से मस्जिदों पर हमले और हत्याएं करवाई गईं।

अमन उपाध्याय

Iran Protest News In Hindi: ईरान के सुरक्षा बलों ने हाल ही में एक चौंकाने वाला दावा किया है कि ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी MI6 (M16) और इजरायल की मोसाद मिलकर ईरान के भीतर अस्थिरता पैदा कर रही हैं।

इन एजेंसियों पर आरोप है कि वे स्थानीय स्तर पर भाड़े के आतंकवादियों और अपराधियों का इस्तेमाल कर रही हैं। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इन विदेशी ताकतों ने ईरान की सड़कों पर आगजनी, तोड़-फोड़ और हत्याओं को अंजाम देने के लिए एक खौफनाक नेटवर्क तैयार किया है।

सोशल मीडिया बना भर्ती का हथियार

ईरानी खुफिया विभाग के अनुसार, मोसाद और अन्य एजेंसियां सीधे तौर पर नहीं बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को अपने जाल में फंसाती हैं। शुरुआत में उन्हें फोटो खींचने, रेकी करने या किसी खास जगह की जानकारी जुटाने जैसे छोटे-छोटे काम दिए जाते हैं जिसके बदले उन्हें मामूली रकम दी जाती है। धीरे-धीरे ये युवा बड़ी साजिशों का हिस्सा बन जाते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि मस्जिदों में आग लगाने और लक्षित हत्याएं करने जैसे जघन्य अपराधों के लिए स्थानीय अपराधियों को मात्र 300 डॉलर (करीब 27 हजार भारतीय रुपये) दिए गए।

पुराने 'आतंकवादी सेल' का खुलासा

यह पहली बार नहीं है जब ईरान ने ऐसे दावे किए हैं। सुरक्षा बलों का कहना है कि जून 2025 में भी एक बड़े 'आतंकवादी सेल' को पकड़ा गया था। उस दौरान पकड़े गए समूहों के पास से भारी मात्रा में विस्फोटक और ड्रोन बरामद हुए थे। दावा किया गया था कि विदेशी ताकतें इन समूहों को ड्रोन और हथियारों की सप्लाई कर रही थीं ताकि भीड़भाड़ वाले इलाकों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा सके।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और वर्तमान स्थिति

खामेनेई के देश में लंबे समय से चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच अब स्थिति कुछ शांत होती दिख रही है। एक ओर ईरान ने प्रदर्शनकारियों की फांसी की सजा पर रोक लगाई है वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी फिलहाल हमला न करने का संकेत दिया है।

हालांकि, ईरान अपनी सड़कों पर हो रही हिंसा को लगातार विदेशी साजिश बता रहा है। इन गंभीर आरोपों पर फिलहाल ब्रिटेन या इजरायल की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। विशेषज्ञ इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाने की कूटनीति के रूप में भी देख रहे हैं।

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