ईरान में बाल विवाह की डरावनी सच्चाई (सोर्स-सोशल मीडिया) 
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ईरान में बाल विवाह की डरावनी सच्चाई... 9 साल की उम्र में भी हो सकती है बच्चियों की शादी

Child Marriage Laws: ईरान में लड़कियों की शादी की कानूनी उम्र मात्र 13 साल है, लेकिन पिता और जज की अनुमति से 9 साल से कम उम्र में भी निकाह संभव है। यह कानून बच्चों के भविष्य को खतरे में डाल रहा है।

प्रिया सिंह

Iran Legal Marriage Age Girls: ईरान वर्तमान में अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' का सामना कर रहा है। ऐसे समय में ईरानी सरकारी मीडिया पश्चिमी देशों की नैतिकता पर सवाल उठाकर दुनिया का ध्यान भटका रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि ईरान के अपने ही कानून बच्चों के अधिकारों का खुलेआम हनन कर रहे हैं। वहां बच्चियों की शादी की उम्र को लेकर जो नियम हैं, वे किसी को भी हैरान और विचलित कर सकते हैं।

कानून और अनुच्छेद 1041

ईरानी नागरिक संहिता के अनुच्छेद 1041 के तहत लड़कियों की शादी की न्यूनतम कानूनी उम्र 13 वर्ष है। वहीं लड़कों के लिए शादी की यह उम्र 15 वर्ष निर्धारित की गई है जो अंतरराष्ट्रीय मानकों से बहुत कम है। यह कानून बच्चों के बचपन को छीनकर उन्हें जबरन परिपक्वता की ओर धकेलने का एक कानूनी जरिया बन गया है।

9 साल में भी शादी संभव

ईरानी कानून में एक बहुत ही चिंताजनक प्रावधान है जो पिता और न्यायाधीश को विशेष अधिकार देता है। अगर पिता सहमत हो और जज अनुमति दे दे, तो 8 वर्ष 9 महीने की बच्ची की भी शादी हो सकती है। यह डरावनी सच्चाई दिखाती है कि वहां कानूनी सुरक्षा के नाम पर बच्चों का संस्थागत शोषण किया जा रहा है।

सरकारी प्लेटफॉर्म का सहारा

हैरानी की बात यह है कि बाल विवाह को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा लाइसेंस प्राप्त वेबसाइट्स काम कर रही हैं। 'आदम एंड हवा' जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर माता-पिता 12-13 साल के बच्चों के शादी के प्रोफाइल बना सकते हैं। पारंपरिक परिवार बनाने के नाम पर ये सरकारी साइट्स बाल-वधुओं के व्यापार को आधुनिक रूप प्रदान कर रही हैं।

आंकड़ों की जुबानी

ईरान के सांख्यिकी केंद्र के अनुसार हर साल 15 साल से कम उम्र की हजारों लड़कियों की शादी कर दी जाती है। इनमें से एक बड़ी संख्या उन बच्चियों की है जो ड्राइविंग की उम्र तक पहुंचने से पहले ही मां बन जाती हैं। मानवाधिकार वकीलों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों के गैर-पंजीकृत मामले सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक भयावह हैं।

ध्यान भटकाने की रणनीति

ईरानी मीडिया अक्सर जेफरी एपस्टीन और डोनाल्ड ट्रंप जैसे पश्चिमी नेताओं के डीपफेक वीडियो फैलाकर दुष्प्रचार करता है। यह रणनीति पश्चिमी समाज को बाल यौन शोषण का केंद्र बताकर अपने घर की बुराइयों को छिपाने के लिए है। युद्ध के बीच अपनी गिरती साख बचाने के लिए तेहरान वैचारिक प्रक्षेपण का सहारा लेकर दुनिया को गुमराह कर रहा है।

मानवीय अधिकारों का हनन

ईरान में बाल विवाह सिर्फ एक सामाजिक बुराई नहीं बल्कि एक गंभीर कानूनी और मानवाधिकार संकट बन गया है। कम उम्र में मां बनने और पढ़ाई छूटने के कारण इन बच्चियों का शारीरिक और मानसिक विकास बुरी तरह रुक जाता है। अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद ईरान अपनी इस दकियानूसी कानूनी व्यवस्था में बदलाव करने को तैयार नजर नहीं आता है।

भविष्य पर मंडराता खतरा

इस संस्थागत बाल विवाह प्रथा ने ईरान की युवा पीढ़ी के भविष्य को पूरी तरह से अंधकार में डाल दिया है। जब तक इन कानूनों में सुधार नहीं होगा तब तक हजारों मासूम बच्चियां इस शोषणकारी व्यवस्था का शिकार होती रहेंगी। युद्ध और आंतरिक विद्रोह के बीच यह मुद्दा अब वैश्विक चर्चा का विषय बन गया है जिसकी अनदेखी मुमकिन नहीं है।

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