ईरान की सेना ने ट्रंप को चेतावनी दी (सोर्स- सोशल मीडिया) 
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'हाथ लगाया तो हाथ ही काट देंगे...', ईरानी जनरल ने डोनाल्ड ट्रंप को दी सीधी चुनौती, वाशिंगटन में मचा हड़कंप

US-Iran Tensions: ईरान के सशस्त्र बलों ने ट्रंप को चेतावनी दी कि अगर खामेनेई के खिलाफ कोई कदम उठाया गया, तो उनका जवाब न केवल उसे रोक देगा बल्कि पूरी दुनिया को प्रभावित करेगा।

अक्षय साहू

Iran Armed Forces Warns Trump: ईरान के सशस्त्र बलों के एक प्रवक्ता ने मंगलवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी दी कि वे ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ किसी भी कार्रवाई से बचें। उन्होंने कहा कि अगर ट्रंप ईरानी नेता के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करते हैं तो उन्हें इसके बुरे परिणाम भुगतने होंने। 

जानकारी के मुताबिक, ईरानी सशस्त्र बलों के जनरल अबुलफजल शेखरची ने कहा, "ट्रंप जानते हैं कि अगर हमारे नेता की ओर कोई हाथ बढ़ाया गया, तो हम न केवल उस हाथ को काट देंगे बल्कि उनकी दुनिया को भी आग लगा देंगे।" ईरान की इस चेतानवी ने दोनों देशों तनाव फिर बढ़ता नजर आ रहा है।

ट्रंप ने खामेनेई को लेकर क्या कहा?

डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को ‘पॉलिटिको’ को दिए साक्षात्कार में खामेनेई को ‘बीमार व्यक्ति’ कहा था और सुझाव दिया था कि उन्हें अपने देश को ठीक से चलाना चाहिए और लोगों की हत्या रोकनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में नए नेतृत्व की तलाश का समय आ गया है। ट्रंप की इन टिप्पणियों के तुरंत बाद शेखरची ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

ईरान में हाल के महीनों में बढ़ते तनाव का एक बड़ा कारण देश की बिगड़ती अर्थव्यवस्था है। 28 दिसंबर से शुरू हुए प्रदर्शनों में अधिकारियों ने हिंसक कार्रवाई की, जिससे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी चेतावनी दी कि अगर ईरान के लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, तो इसके पीछे अमेरिकी सरकार और उसके सहयोगियों की लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी और प्रतिबंध जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम लीडर के खिलाफ कोई भी हमला ईरान के खिलाफ पूर्ण युद्ध के बराबर होगा।

ईरान में प्रदर्शनों में कितने लोग मारे गए

इन विरोध प्रदर्शनों में अब तक सख्त कार्रवाई के कारण कम से कम 4,029 लोगों की मौत हुई है। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी ने यह जानकारी दी। उनके अनुसार, इस दौरान 26,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। मृतकों में 3,786 प्रदर्शनकारी, 180 सुरक्षाकर्मी, 28 बच्चे और 35 ऐसे लोग शामिल हैं जो किसी भी प्रदर्शन में शामिल नहीं थे।

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