ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही (सोर्स-सोशल मीडिया) 
विदेश

ईरान का अमेरिका पर आरोप: उभरती शक्तियों भारत-चीन और रूस को रोकने के लिए दुनिया में युद्ध भड़का रहा वाशिंगटन

Iran USA Standoff: ईरान ने अमेरिका पर भारत, चीन और रूस जैसी उभरती ताकतों को रोकने के लिए युद्ध भड़काने का आरोप लगाया है। तेहरान ने सम्मानजनक शर्तों पर शांति और बातचीत की पेशकश भी की है।

प्रिया सिंह

Geopolitical Impact Of Middle East War: ईरान ने अमेरिका पर वैश्विक संघर्षों को जानबूझकर हवा देने का बड़ा आरोप लगाया है ताकि भारत, चीन और रूस का विकास रोका जा सके। तेहरान ने शांति की इच्छा जताते हुए सम्मानजनक शर्तों पर बातचीत की पेशकश की है लेकिन साथ ही भविष्य के खतरों पर आगाह भी किया है। ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि के अनुसार अमेरिका नहीं चाहता कि दुनिया बहुध्रुवीय बने और कोई अन्य देश उसका बराबर का साझीदार बने। यह विवाद ऐसे समय में गहराया है जब इजरायल और अमेरिका के हमलों ने मध्य पूर्व में भारी तबाही मचा रखी है और तनाव चरम पर है।

भारत और चीन पर अमेरिका की नजर

ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि अमेरिका का असली निशाना सिर्फ ईरान नहीं बल्कि उभरती ताकतें हैं। उनका दावा है कि वाशिंगटन नहीं चाहता कि निकट भविष्य में भारत या चीन जैसे देश शक्तिशाली बनकर उसके प्रभुत्व को कोई चुनौती पेश करें। इसीलिए अमेरिका जानबूझकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में युद्ध छेड़ रहा है ताकि इन देशों की प्रगति और विकास की राह में बाधा डाली जा सके।

शांति के लिए ईरान की कड़ी शर्तें

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच इलाही ने संकेत दिया कि ईरान कूटनीति के लिए तैयार है लेकिन यह बातचीत केवल गरिमापूर्ण होनी चाहिए। ईरान की मांग है कि अगर अमेरिका युद्ध रोकता है, प्रतिबंध हटाता है और भविष्य में हमला न करने की गारंटी देता है तो शांति संभव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान ने यह संघर्ष शुरू नहीं किया है बल्कि अमेरिका और इजरायल ने उनके मासूम नागरिकों पर बमबारी करके उन्हें उकसाया है।

कूटनीति की मेज पर हुआ हमला

एक चौंकाने वाले खुलासे में ईरान ने दावा किया कि हमलों से ठीक पहले ओमान के जरिए अमेरिका के साथ एक समझौता होने ही वाला था। दोनों पक्ष एक संयुक्त बयान जारी करने के करीब पहुंच गए थे लेकिन तभी अचानक सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी गई जिससे पूरी प्रक्रिया बाधित हुई। ईरान का आरोप है कि उसने कभी कूटनीति का रास्ता नहीं छोड़ा बल्कि अमेरिका ने खुद को पीछे खींचकर युद्ध का रास्ता चुनना ज्यादा बेहतर समझा है।

ट्रंप का कड़ा रुख और बढ़ती तबाही

दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जब तक ईरान की मिसाइल और परमाणु क्षमताएं नष्ट नहीं होतीं सैन्य अभियान जारी रहेगा। ट्रंप ने ईरान की शांति वार्ता की पेशकश को 'बहुत देर' से उठाया गया कदम बताया है जिससे इस क्षेत्र में फिलहाल शांति की उम्मीदें धूमिल हैं। इस भीषण संघर्ष में अब तक 500 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अपने छह सैनिकों की मौत की पुष्टि की है।

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