आतंकवाद से पीड़ितों का अंतरराष्ट्रीय स्मरण दिवस (सोर्स- AI)
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21 August: आतंकवाद से पीड़ितों का अंतरराष्ट्रीय स्मरण दिवस, जानिए इसका इतिहास, महत्व और भारत का रुख

Victims Terrorism Day: आतंकवाद से पीड़ितों का अंतरराष्ट्रीय स्मरण दिवस यह महत्वपूर्ण दिन 21 अगस्त के इतिहास को दर्शाता है। जानिए आतंकवाद पीड़ितों के वैश्विक प्रभाव से जुड़ी मुख्य बातें।

प्रिया सिंह

International Day of Remembrance and Tribute to Victims Of Terrorism: 21 अगस्त का दिन वैश्विक स्तर पर आतंकवाद की हिंसा झेल चुके बेकसूर लोगों को समर्पित है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2017 में प्रस्ताव 72/165 पारित करके इस विशेष दिन की नींव रखी थी। आतंकवाद पीड़ितों का अंतरराष्ट्रीय स्मरण दिवस का मुख्य उद्देश्य प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाना है। यह दिन पीड़ितों को पुनर्वास सहायता प्रदान करने और समाज में उन्हें सम्मानजनक स्थान देने का संकल्प दोहराता है।

आतंकवाद का अर्थ किसी राजनीतिक, धार्मिक या वैचारिक उद्देश्य को पूरा करने के लिए नागरिकों में भय पैदा करना है। इस तरह के हिंसक कृत्य निर्दोष लोगों की जान लेते हैं और सामाजिक व्यवस्था को छिन्न-भिन्न कर देते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्मरण दिवस हमें यह याद दिलाता है कि पीड़ितों की पीड़ा समय के साथ समाप्त नहीं होती। इस अवसर पर दुनिया भर के देश एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का संकल्प लेते हैं।

आतंकवाद की परिभाषा और इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

आतंकवाद एक ऐसी हिंसक मानसिकता है जो निर्दोष लोगों को निशाना बनाकर समाज में दहशत फैलाती है। संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2017 में 21 अगस्त को इस दिवस के रूप में घोषित किया था। इसका प्राथमिक उद्देश्य आतंकवाद के शिकार हुए लोगों के मानवाधिकारों की रक्षा करना है। यह पहल दुनिया भर के पीड़ितों को एक मंच प्रदान करती है ताकि उनकी आवाज सुनी जा सके।

अंतरराष्ट्रीय स्मरण दिवस का महत्व और वैश्विक एकजुटता

यह दिन आतंकवाद के बचे हुए पीड़ितों की मानसिक, शारीरिक और वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने पर बल देता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस अवसर पर एकजुट होकर पीड़ितों के पुनर्वास के लिए नीतियां तैयार करता है। पीड़ितों को अकेलेपन की भावना से बचाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा में जोड़ना इसका प्रमुख लक्ष्य है। वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए पीड़ितों की कहानियों को याद रखना अत्यंत आवश्यक है।

आतंकवाद के घातक सामाजिक और आर्थिक नकारात्मक प्रभाव

आतंकवाद किसी भी देश की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और ढांचागत विकास को भारी नुकसान पहुंचाता है। हिंसक हमलों के कारण हजारों परिवार बेघर हो जाते हैं और बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो जाता है। समाज में आपसी अविश्वास, डर और नफरत का माहौल पैदा होता है जो सामाजिक ताने-बाने को तोड़ता है। इन नकारात्मक प्रभावों से उबरने में प्रभावित देशों को कई दशकों का समय लग जाता है।

वैश्विक आतंकवाद की चुनौती और भारत का कड़ा रुख

वैश्विक आतंकवाद आज पूरी दुनिया के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बना हुआ है। भारत दशकों से सीमा पार आतंकवाद का दंश झेलता रहा है और इसने 26/11 जैसे भयानक हमले देखे हैं। भारत ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति का समर्थन किया है। भारत का स्पष्ट मानना है कि आतंकवाद के सभी रूपों को समाप्त किए बिना वैश्विक शांति संभव नहीं है।

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