Rescue Of Stranded Indian Vessel: भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बावजूद समुद्र से एक बहुत ही सकारात्मक खबर सामने आई है। अरब सागर में बीच रास्ते में फंसे एक भारतीय मर्चेंट जहाज 'गौतम' की पाकिस्तानी नौसेना ने मदद की है। यह जहाज ओमान के शिनास से अपनी अंतिम यात्रा पर गुजरात के आलंग बंदरगाह की तरफ जा रहा था। इसी दौरान तीन मई को बीच समुद्र में इस जहाज का मुख्य जनरेटर अचानक से पूरी तरह खराब हो गया।
इस गंभीर खराबी के बाद जहाज की बिजली कट गई और इसके सभी प्रमुख संचार साधन लगभग बंद हो गए। घटना के समय यह भारतीय मर्चेंट जहाज पाकिस्तान के समुद्री सर्च एंड रेस्क्यू क्षेत्र के भीतर मौजूद था। पाकिस्तानी नौसेना ने सूचना मिलते ही अपनी प्रतिक्रिया दी और चालक दल को खाने-पीने का जरूरी सामान उपलब्ध कराया। हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारी जहाज के जनरेटर की इस बड़ी तकनीकी खराबी को ठीक करने में पूरी तरह से असमर्थ रहे।
तीन मई को जनरेटर खराब होने के कारण इस जहाज की सारी व्यवस्था और बिजली पूरी तरह से गुल हो गई थी। इसके बाद यह जहाज बिना इंजन के 1.5 नॉट की गति से पूर्व-उत्तर दिशा में धीरे-धीरे आगे बहने लगा। चार मई की रात 8:45 बजे तक यह जहाज बहकर द्वारका लाइटहाउस से लगभग 262 समुद्री मील दूर भारतीय क्षेत्र में पहुंच गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस फंसे हुए जहाज पर कुल सात क्रू मेंबर सवार थे जो भारी मुसीबत में फंस गए थे। इन फंसे हुए सदस्यों में मुख्य रूप से एक इंडोनेशियाई नागरिक और छह भारतीय नागरिक शामिल थे जिनकी जान को खतरा था। भारतीय तटरक्षक बल को जब इस घटना की सूचना मिली तो उन्होंने तुरंत अपनी तरफ से रेस्क्यू अभियान की शुरुआत कर दी।
भारतीय तटरक्षक जहाज 'राजरतन' को तुरंत इस प्रभावित जहाज की स्थिति जानने के लिए घटनास्थल पर रवाना किया गया था। राजरतन के पास पहुंचने पर यह पता चला कि जहाज में केवल वीएचएफ जैसी कुछ सीमित संचार सुविधाएं ही काम कर रही थीं। अधिकारियों की गहन जांच में यह बात सामने आई कि जहाज का मुख्य जनरेटर पूरी तरह से खराब होकर बेकार हो चुका था।
यह भी पढ़ें: Iraq Oil: सस्ता तेल और नई डील! रूस के नक्शेकदम पर इराक, भारत को भारी छूट देने के लिए रखी शर्तें
भारतीय तटरक्षक बल ने महानिदेशालय से इस जहाज को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए टग बोट का अनुरोध किया है। बिना लाइट के 0.6 नॉट की गति से समुद्र में बहता हुआ यह जहाज अन्य वाणिज्यिक जहाजों के लिए एक बड़ा खतरा है। छह मई की सुबह 6:45 बजे तक इसकी स्थिति द्वारका से लगभग 264 समुद्री मील दूर बताई गई है ताकि निरंतर नजर रखी जा सके।