फारस की खाड़ी में जहाज (सोर्स- सोशल मीडिया)
विदेश

फारस की खाड़ी में 12 जहाजों पर सवार हैं 163 भारतीय नाविक, विदेश मंत्रालय ने की पुष्टि

Indian Sailors Safety: फारस की खाड़ी में 12 कमर्शियल जहाजों पर 163 भारतीय नाविक सवार हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार क्षेत्र में 4500 से अधिक नाविक मौजूद हैं जिनकी सुरक्षा की निगरानी जारी है।

प्रिया सिंह

Indian Sailors Persian Gulf Safety: विदेश मंत्रालय ने फारस की खाड़ी में भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर बयान दिया है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट के पास 12 जहाजों पर 163 भारतीय नाविक सवार हैं। इनमें 6 भारतीय ध्वज तथा 6 विदेशी ध्वज के जहाज शामिल हैं जो भारत माल ला रहे हैं।

इसके अलावा क्षेत्र में विभिन्न वाणिज्यिक जहाजों पर 4500 से अधिक भारतीय नाविक तैनात हैं। जहाजरानी मंत्रालय दूतावासों के माध्यम से जहाजों की आवाजाही व नाविकों की निगरानी कर रहा है। भारत सरकार विदेशों में काम कर रहे अपने नाविकों की सुरक्षा व भलाई के लिए प्रतिबद्ध है।

होर्मुज स्ट्रेट और खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में मीडिया ब्रीफिंग में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में 12 वाणिज्यिक जहाजों पर 163 भारतीय नाविक सवार हैं। इन 12 जहाजों में 6 भारतीय ध्वज वाले तथा 6 विदेशी ध्वज वाले जहाज शामिल हैं।

क्षेत्र में मौजूद 4500 से अधिक अन्य भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। जहाजरानी मंत्रालय दूतावासों व हितधारकों के साथ मिलकर जहाजों की निगरानी कर रहा है।

पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में जहाजों पर हमलों की भारत ने निंदा की। भारत ने होर्मुज स्ट्रेट जैसे जलमार्गों में मुक्त नेविगेशन में बाधा डालने का विरोध किया। सरकार ने क्षेत्र में शांति व स्थिरता की बहाली हेतु संवाद तथा कूटनीति पर बल दिया।

न्यूयॉर्क में जीओएफ ऑन S4 की बैठक और डॉ. एस जयशंकर का संबोधन

25 सितंबर को न्यूयॉर्क में 'शिपिंग और नाविकों की सुरक्षा पर मित्र समूह' की बैठक हुई। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने बैठक में नाविकों व जहाजों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। भारत नाविकों का मुख्य स्रोत है और लाइबेरिया सबसे बड़ी शिपिंग रजिस्ट्री है, जो साथ आए हैं।

डॉ. जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा मजबूत करने तथा नाविकों की सुरक्षा का आह्वान किया।बैठक में विदेश मंत्री ने ओमान की खाड़ी में बल्क कैरियर एमवी सीएपीई डीएओ पर हमले का जिक्र किया।

23 सितंबर को हुए इस हमले में 1 भारतीय नाविक की मौत हुई, जो गंभीर चिंता का विषय है। इससे 10 दिन पहले पनामा ध्वज के टैंकर ईएल जीएआईए पर हमला हुआ, जिससे 1 भारतीय चालक लापता है। विदेश मंत्री ने कहा कि लाल सागर, खाड़ी तथा काला सागर में जहाजों पर हमले चिंताजनक हैं।

काला सागर में जहाजों पर हमले और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील

विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने काला सागर में भारतीय नाविकों पर हुए हमलों का विवरण दिया। 18 जुलाई को रूसी जलक्षेत्र में एमवी ओएमओआरएफआई पर हमला हुआ, जिसमें भारतीय चीफ ऑफिसर की मौत हुई। अगले दिन 19 जुलाई को ओडेसा से निकलने के बाद एमवी गोल्डन लीयो पर हमले में 4 नाविक मारे गए।

इन घटनाओं से साबित होता है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में नाविकों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह नाविकों पर बढ़ते हमलों के खिलाफ एकजुट हो। काला सागर से लेकर लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र तक वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है।

भारत ने कहा कि निर्दोष नाविकों की जान जोखिम में डालना तथा नागरिक जहाजों पर हमले करना गलत है। ग्लोबल ट्रेड सुचारू रखने के लिए सभी देशों को समुद्री सुरक्षा हेतु सहयोग करना होगा।

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