75 रुपये की प्लास्टिक शीट जो हजारों महिलाओं की जान बचा रहा। सोर्स: गूगल
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75 रुपये की प्लास्टिक कैसे बचा रही हजारों गर्भवती माताओं की जान? 4 प्वॉइंट में जानें

How Use Maternal Drape: महज 75 रुपये की प्लास्टिक शीट प्रसव के दौरान महिलाओं की जान बचा रही है। मैटरनल ड्रेप से रक्तस्राव की पहचान आसान हुई और मातृ मृत्यु में दो-तिहाई कमी आई।

अमन कुमार पाण्डेय

Highlights:

  • 75 रुपये का मैटरनल ड्रेप प्रसव के दौरान महिलाओं के लिए जीवनरक्षक बन रहा है।

  • प्लास्टिक शीट की थैली से प्रसव के बाद होने वाले अत्यधिक रक्तस्राव का तुरंत पता चलता है।

  • इस तकनीक से अस्पतालों में मातृ मृत्यु के मामलों में करीब दो-तिहाई की कमी दर्ज की गई।

Maternal Drape Saving Lives of Pregnant Mothers: अफ्रीका के गरीब देशों में प्रसव के दौरान महिलाओं की मौत एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। खासकर बच्चे को जन्म देने के बाद अत्यधिक रक्तस्राव यानी पोस्टपार्टम हेमोरेज (PPH) हजारों महिलाओं की जान ले रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए अब एक बेहद सस्ता और आसान उपाय सामने आया है। महज 75 रुपये की एक खास प्लास्टिक शीट नाइजीरिया में गर्भवती महिलाओं के लिए जीवनरक्षक साबित हो रही है। इस तकनीक के इस्तेमाल से अस्पतालों में प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव से होने वाली मौतों में करीब दो-तिहाई तक कमी दर्ज की गई है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, दुनियाभर में हर साल लगभग 70 हजार महिलाओं की मौत प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव के कारण होती है। इस समस्या का सबसे ज्यादा असर गरीब और विकासशील देशों में देखने को मिलता है। नाइजीरिया उन देशों में शामिल है, जहां मातृ मृत्यु दर बेहद अधिक है। यहां स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, प्रशिक्षित डॉक्टरों और नर्सों का अभाव महिलाओं की मुश्किलें बढ़ा देता है।

क्या है पोस्टपार्टम हेमोरेज, जिससे जाती है महिलाओं की जान?

पोस्टपार्टम हेमोरेज ऐसी स्थिति है, जिसमें बच्चे के जन्म के बाद महिला के शरीर से जरूरत से ज्यादा खून बहने लगता है। आमतौर पर बच्चे के जन्म के बाद प्लेसेंटा यानी गर्भनाल गर्भाशय से अलग हो जाता है। इसके बाद गर्भाशय सिकुड़कर उन रक्त वाहिकाओं को बंद कर देता है, जिनसे खून बह रहा होता है।

हालांकि, कुछ मामलों में गर्भाशय ठीक से सिकुड़ नहीं पाता या प्लेसेंटा का कुछ हिस्सा अंदर रह जाता है। ऐसी स्थिति में रक्तस्राव लगातार जारी रहता है। समय रहते इलाज नहीं मिलने पर महिला की हालत तेजी से बिगड़ सकती है और उसकी जान भी जा सकती है।

इस बीमारी से निपटने में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई बार डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को समय रहते यह अंदाजा ही नहीं लग पाता कि महिला के शरीर से कितना खून निकल चुका है।

कैसे काम करती है 75 रुपये की यह खास प्लास्टिक शीट?

इस समस्या का समाधान एक खास उपकरण के रूप में सामने आया है, जिसे मैटरनल ड्रेप (Maternal Drape) कहा जाता है। यह हरे रंग की पतली प्लास्टिक शीट होती है, जिसके एक हिस्से में खून इकट्ठा करने के लिए थैली लगी होती है।

डिलीवरी के दौरान इसे महिला के शरीर के नीचे बिछाया जाता है। प्रसव के बाद निकलने वाला खून सीधे इस थैली में जमा होता रहता है। थैली पर अलग-अलग स्तर के निशान बने होते हैं। इनमें 300 मिलीलीटर का निशान बेहद महत्वपूर्ण है। अगर खून इस स्तर से ऊपर पहुंच जाता है, तो यह खतरे का संकेत होता है और डॉक्टरों को तुरंत इलाज शुरू करना पड़ता है।

इस तरह डॉक्टरों को केवल अनुमान लगाने के बजाय रक्तस्राव की वास्तविक मात्रा का पता चल जाता है। इससे समय रहते जरूरी इलाज शुरू करना आसान हो जाता है।

भारत से मंगाई जाती थीं शीट, अब नाइजीरिया में ही निर्माण

इस तकनीक को नाइजीरिया में बड़े स्तर पर लागू करने की राह आसान नहीं थी। शुरुआत में रिसर्च के लिए इस्तेमाल किए गए मैटरनल ड्रेप भारत से मंगाए गए थे। इनकी कीमत करीब 300 रुपये प्रति शीट थी। नाइजीरिया जैसे देश के लिए इतनी कीमत पर बड़े पैमाने पर इनका इस्तेमाल करना मुश्किल था।

इसके बाद बायेरो यूनिवर्सिटी, कानो की प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. हदीजा गलाडांसी ने इसका स्थानीय स्तर पर निर्माण कराने की पहल की। उन्होंने कानो की एक स्थानीय कंपनी सिस्ट्स इंजीनियरिंग से संपर्क किया। यह कंपनी पहले प्लेट, कांटे और तेल के डिब्बे जैसे उत्पाद बनाती थी।

कंपनी ने ड्रेप का नमूना तैयार किया, लेकिन बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए ताइवान से विशेष मशीनें मंगानी पड़ीं। गेट्स फाउंडेशन ने इस काम के लिए 6 लाख डॉलर की आर्थिक सहायता दी। इसके बाद कंपनी ने सरकार को प्रत्येक ड्रेप लगभग 70 सेंट में उपलब्ध कराने पर सहमति जताई। कच्चे माल की कीमत बढ़ने के कारण अब इसकी लागत करीब 80 सेंट यानी लगभग 75 रुपये हो गई है।

दूसरे अफ्रीकी देशों तक पहुंच रही तकनीक

नाइजीरिया में इस प्लास्टिक ड्रेप और इसके साथ अपनाए जाने वाले इलाज के तरीके के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। एक रिसर्च में अस्पतालों में प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव से होने वाली मौतों में करीब दो-तिहाई कमी दर्ज की गई। अब इसका इस्तेमाल देशभर में बढ़ाया जा रहा है। केन्या और दक्षिण अफ्रीका में भी इस तकनीक का परीक्षण किया जा चुका है।

नाइजीरिया में स्थानीय उत्पादन शुरू होने के बाद अब इन ड्रेप को पड़ोसी देशों में भी भेजा जा रहा है। यह पहल दिखाती है कि मातृ मृत्यु दर जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए हमेशा महंगे उपकरणों की जरूरत नहीं होती। कई बार कम कीमत वाला एक साधारण उपकरण भी हजारों महिलाओं की जिंदगी बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।

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