Aramco Attack Drone Strike: यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के नज्रान में स्थित तेल कंपनी अरामको की एक फैसिलिटी पर ड्रोन हमले का दावा किया है। इस अचानक हुई प्राकृतिक और सैन्य हलचल के बाद पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में कूटनीतिक तनाव एक बार फिर काफी बढ़ गया है।
हूती सूत्रों के अनुसार यह हवाई हमला सऊदी लड़ाकू विमानों द्वारा यमन के सादा प्रांत के ऊपर हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने के जवाब में किया गया है। हालांकि सऊदी अरब के अधिकारियों या सरकारी तेल कंपनी अरामको की ओर से इस ड्रोन हमले की अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है।
हूती समूह की SABA समाचार एजेंसी के हवाले से जारी एक आधिकारिक सैन्य रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि यह ड्रोन हमला यमन की संप्रभुता की रक्षा के लिए किया गया था। यमन का आरोप है कि सऊदी सैन्य विमानों ने उसके सादा प्रांत के उत्तर-पूर्वी हवाई क्षेत्र में गैर-कानूनी तरीके से प्रवेश किया था।
इस बड़े दावे के बाद सऊदी अरब सरकार और अरामको के वरिष्ठ अधिकारियों ने अभी तक अपनी तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। इस वजह से अभी तक यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि नज्रान में स्थित तेल फैसिलिटी को इस हमले से कोई बड़ा भौतिक नुकसान हुआ है या नहीं।
इस बीच यमन की सरकारी सेना और हूती विद्रोहियों के बीच बृहस्पतिवार रात भर हिंसक झड़पें होने की गंभीर खबरें आई हैं। इन हमलों से यह बड़ा डर पैदा हो गया है कि यमन में एक बार फिर हिंसक गृहयुद्ध भड़क सकता है और मध्य पूर्व में एक नया कूटनीतिक मोर्चा खुल सकता है।
यमन के साथ-साथ लेबनान में भी राजनीतिक स्थिति तेजी से बिगड़ रही है, जहां हिज्बुल्लाह और वहां की सरकार के बीच आपसी दूरियां काफी बढ़ती जा रही हैं। हिज्बुल्लाह के महासचिव शेख नईम कासिम ने अपने समर्थकों से देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए कड़ा संघर्ष करने को कहा है।
कासिम ने सरकार पर इजरायल के साथ हुए शांति समझौते को लेकर सेना पर अनुचित दबाव बनाने का गंभीर आरोप भी लगाया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि समझौते के तहत दक्षिणी हिस्से से इजरायली सेना की वापसी और हथियारों को छोड़ने की शर्तों का कड़ा विरोध किया जाएगा।