होर्मुज स्ट्रेट (सोर्स- IANS)
विदेश

डोनाल्ड ट्रंप के इनकार के बाद भी बाज नहीं आ रहा ईरान, होर्मुज को लेकर अपनी शर्तों पर अड़ा

Hormuz Strait Crisis: ट्रंप द्वारा शांति प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद भी ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए प्रतिबंध हटाने तथा युद्धविराम जैसी अपनी शर्तों पर अड़े रहने का कड़ा ऐलान किया है।

प्रिया सिंह

Hormuz Strait Crisis Ceasefire Terms: मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शांति प्रस्ताव खारिज किए जाने के बाद स्थिति संवेदनशील हो गई है। इसके जवाब में ईरान ने रणनीतिक होर्मुज स्ट्रेट खोलने के नियमों में ढील न देने की बात कही है।

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान अपनी शर्तों पर अडिग रहेगा। जब तक ईरान की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक जलमार्ग नहीं खोला जाएगा। दोनों देशों का यह गतिरोध अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ा संकट बन चुका है।

होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का कड़ा रुख और शर्तें

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सरकारी प्रसारक IRBI से रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि होर्मुज खोलने के लिए लेबनान सहित मध्य-पूर्व में शत्रुता समाप्त करनी होगी। इसके साथ ही ईरान की फ्रीज की गई परिसंपत्तियों को तुरंत जारी करना होगा।

ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हटाने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करना अनिवार्य है। अराघची ने कहा कि ईरान की शर्तें स्पष्ट हैं और इनमें कोई बदलाव नहीं होगा। जलमार्ग खोलने का कोई भी कदम इन शर्तों के पूरा होने पर ही निर्भर करेगा।

विदेश मंत्री ने कहा कि तेहरान ने कूटनीति के दरवाजे कभी बंद नहीं किए हैं। लेकिन इसके साथ ही ईरान अपने अधिकारों और राष्ट्रीय हितों से पीछे नहीं हटेगा।

डोनाल्ड ट्रंप का बयान और पाकिस्तान की मध्यस्थता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को युद्धविराम प्रस्ताव ठुकराने की पुष्टि की। ट्रंप ने कहा कि ईरानी पक्ष बुरी तरह हार रहा है और वे जलमार्ग खोलना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वे समझौता पसंद करते हैं, लेकिन मौजूदा शर्तों पर सहमति संभव नहीं।

अराघची ने कहा कि मध्यस्थों की ओर से अमेरिका का कोई नया संदेश नहीं मिला है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच जून में पाकिस्तान की मध्यस्थता से समझौता हुआ था। इस MoU का उद्देश्य युद्ध समाप्त करना और परमाणु वार्ता शुरू करना था।

लेकिन यह समझौता तब टूट गया जब ईरान ने कमर्शियल जहाजों पर गोलाबारी की। ईरान का दावा था कि ये व्यापारिक पोत तय रास्ते से भटक गए थे।

सात महीने से जारी सैन्य टकराव और ऊर्जा संकट

अमेरिका और ईरान के बीच यह सैन्य टकराव सात महीने पहले शुरू हुआ था। तब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त रूप से सैन्य हमले किए थे। इसके बाद से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इस भारी संघर्ष का मुख्य केंद्र बना हुआ है।

यह जलमार्ग पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। अगर होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बाधित रहता है तो तेल आपूर्ति प्रभावित होगी। दोनों देशों के अड़ियल रुख से जलमार्ग सामान्य होने की उम्मीद धुंधली दिख रही है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस सैन्य तनाव को कम करने के लिए प्रयास कर रहा है। जब तक सहमति नहीं बनती, तब तक क्षेत्र में शांति बहाली मुश्किल रहेगी।

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