Hormuz Crisis New Maritime Threat: मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री यातायात में आई रुकावटों ने शिपिंग उद्योग के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में महीनों से रुके कार्गो शिप अब समुद्र और तटीय पर्यावरण के लिए एक गंभीर और अनोखे खतरे का कारण बन रहे हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार लंबे समय तक समुद्र में एक ही जगह खड़े रहने के कारण जहाजों की निचली सतह पर बार्नाकल, मसल्स और कई समुद्री जीव जमा हो जाते हैं। इस जैविक प्रक्रिया को बायोफाउलिंग कहा जाता है, जिसके जरिए ये जीव नए बंदरगाहों तक पहुंचकर आक्रामक प्रजातियों और परजीवियों का फैलाव कर सकते हैं।
सामान्य परिस्थितियों में कार्गो शिप बंदरगाहों पर सीमित समय के लिए रुकते हैं। ऐसे में जहाजों की सतह पर समुद्री जीवों को तेजी से पनपने का पर्याप्त समय नहीं मिलता। लेकिन मौजूदा संकट के कारण कई जहाज लंबे समय से समुद्र में एक ही जगह पर रुके हुए हैं।
इस दौरान शैवाल, बार्नाकल, मसल्स और सूक्ष्म समुद्री जीव जहाजों के निचले हिस्से से चिपक सकते हैं। लंबे समय तक ठहराव के कारण इन जीवों की संख्या बढ़ सकती है और जहाज के दोबारा चलने पर वे दूसरे समुद्री क्षेत्रों तक पहुंच सकते हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक समुद्री व्यापार और कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण जलमार्ग है। संकट से पहले इस मार्ग से बड़ी संख्या में व्यापारिक जहाज गुजरते थे। अगर लंबे समय से रुके जहाजों के हुल पर समुद्री जीव जमा हो गए हैं, तो समुद्री यातायात सामान्य होने पर वे दूसरे देशों के बंदरगाहों तक पहुंच सकते हैं।
मुंबई, कोलंबो और सिंगापुर जैसे प्रमुख एशियाई पोर्ट इस जोखिम के दायरे में आ सकते हैं। इसके अलावा पश्चिम एशिया और यूरोप के बंदरगाहों के समुद्री पर्यावरण पर भी इसका असर पड़ सकता है।
बायोफाउलिंग के जरिए केवल सामान्य समुद्री जीव ही नहीं, बल्कि परजीवी और कुछ सूक्ष्मजीव भी एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक पहुंच सकते हैं। नए समुद्री वातावरण में पहुंचने के बाद बाहरी प्रजातियां स्थानीय मछलियों, शेलफिश और अन्य जीवों के लिए प्रतिस्पर्धा पैदा कर सकती हैं।
अगर किसी बाहरी प्रजाति को नए वातावरण में अनुकूल परिस्थितियां मिल जाती हैं, तो वह तेजी से फैल सकती है और स्थानीय प्रजातियों के लिए खतरा बन सकती है। इससे समुद्री जैव विविधता और तटीय इकोसिस्टम प्रभावित होने की आशंका रहती है।
ऐसे में होर्मुज संकट का असर केवल व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि लंबे समय तक रुके जहाजों के कारण समुद्री पर्यावरण के लिए भी नई चुनौती सामने आ सकती है।