मिडिल ईस्ट महाजंग (सोर्स-सोशल मीडिया) 
विदेश

Middle East War: ट्रंप से नाराज हुए खाड़ी देश, ईरान के हमलों से सऊदी और कुवैत में भारी तबाही

Trump Iran Conflict: मिडिल ईस्ट की जंग में खाड़ी देश ट्रंप से बेहद खफा हैं। ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों ने सऊदी अरब और कुवैत को निशाना बनाया है, जिसमें 6 अमेरिकी सैनिक भी मारे गए हैं।

प्रिया सिंह

Impact Of US Iran War On Gulf Allies: मिडिल ईस्ट में छिड़ी भीषण जंग अब अमेरिका के लिए भी बड़ी मुसीबत बनती जा रही है क्योंकि उसके भरोसेमंद साथी ही अब उससे किनारा करने लगे हैं। खाड़ी देशों का साफ कहना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल ने ईरान पर हमला करने से पहले उन्हें अंधेरे में रखा और कोई जानकारी साझा नहीं की। इस युद्ध की तपिश अब सीधे तौर पर सऊदी अरब और कुवैत जैसे देशों तक पहुंच गई है जहां ईरान के ड्रोन और मिसाइलें कहर बरपा रही हैं। अब स्थिति यह है कि वॉशिंगटन और उसके अरब सहयोगियों के बीच दरार बढ़ती जा रही है जिससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।

खाड़ी देशों की नाराजगी और ट्रंप पर उठते सवाल

खाड़ी देशों के अधिकारियों का मानना है कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी के शुरुआती हमलों की सूचना न देकर उनके साथ बड़ा विश्वासघात किया है। अगर उन्हें पहले पता होता तो वे ईरान के पलटवार से निपटने के लिए बेहतर तैयारी कर सकते थे और मासूमों की जान बचाई जा सकती थी। उनका आरोप है कि अमेरिका ने उनकी उन चेतावनियों को भी नजरअंदाज कर दिया कि यह युद्ध पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी परिणाम लेकर आएगा।

सऊदी अरब और कुवैत में ईरान का भीषण पलटवार

ईरान ने अपनी जवाबी कार्रवाई में सऊदी अरब की राजधानी रियाद में स्थित अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाया है जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मच गया है। कुवैत के एक नागरिक बंदरगाह पर हुए ईरानी ड्रोन हमले में 6 अमेरिकी सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं जो इस युद्ध की भयावहता को दर्शाता है। ईरान अब तक खाड़ी देशों पर लगभग 380 मिसाइलें और 1,480 से अधिक ड्रोन दाग चुका है जिसमें अब तक 13 लोगों की मौत हुई है।

सुरक्षा की कमी और खत्म होते रक्षा संसाधन

खाड़ी अरब देशों का दूसरा बड़ा दुख यह है कि अमेरिकी सेना उनकी पर्याप्त रक्षा करने के बजाय केवल इजरायल और अपने सैनिकों को बचाने में जुटी हुई है। इन देशों को लगता है कि उन्हें उनकी सुरक्षा के भरोसे अकेला छोड़ दिया गया है जबकि वे ईरान की कम दूरी की मिसाइलों की आसान पहुंच में हैं। वर्तमान में इन देशों के पास हमलों को रोकने वाले इंटरसेप्टर्स भी तेजी से खत्म हो रहे हैं जिससे उनकी सुरक्षा प्रणाली कमजोर होती जा रही है।

नेतन्याहू और ट्रंप के बीच का विवादित गठबंधन

सऊदी अरब के पूर्व खुफिया प्रमुख प्रिंस तुर्की अल-फैसल ने खुलकर कहा है कि यह युद्ध इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की अपनी निजी महत्वाकांक्षाओं का परिणाम है। उनका मानना है कि नेतन्याहू ने किसी तरह राष्ट्रपति ट्रंप को अपने विचारों के समर्थन के लिए मना लिया और उन्हें इस अनावश्यक युद्ध की आग में धकेल दिया है। इस राजनीतिक खींचतान के बीच पेंटागन भी अब ईरान के लगातार बढ़ते ड्रोन हमलों को रोकने के लिए संघर्ष करता हुआ नजर आ रहा है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम जनता पर बढ़ता बोझ

इस महाजंग का असर अब सीमाओं से निकलकर आम जनता की जेबों तक पहुंचने लगा है जैसा कि पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल के दाम 55 रुपये बढ़ गए हैं। रूस द्वारा ईरान को अमेरिकी सेना और फाइटर जेट्स की गुप्त जानकारी मुहैया कराने की खबरों ने युद्ध के इस नए मोर्चे पर आग में घी डालने का काम किया है। हर गुजरते दिन के साथ तबाही का मंजर गहरा होता जा रहा है और 14 देशों तक फैली इस जंग का कोई अंत फिलहाल नजर नहीं आता।

तेल आपूर्ति पर खतरा और रूसी हस्तक्षेप

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते ईरानी हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो रही है क्योंकि तेल कुएं और रिफाइनरी अब सीधे ईरानी मिसाइलों के निशाने पर हैं। अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स का दावा है कि रूस अब सक्रिय रूप से ईरान को अमेरिकी युद्धपोतों और फाइटर जेट्स की गुप्त लोकेशन की जानकारी साझा कर रहा है। इस नए सैन्य गठबंधन ने मिडिल ईस्ट के शक्ति संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ दिया है और शांति की तमाम कूटनीतिक कोशिशें अब असफल होती दिख रही हैं।

BRICS Summit 2026 LIVE: पीएम मोदी-पेजेश्यिकान के बीच बैठक खत्म, ईरान के विदेश मंत्री अराघची भी रहे मौजूद

मोदी ने बताया BRICS की ताकत, पुतिन ने G7 पर साधा निशाना...बिजनेस फोरम में संबोधन की 10 बड़ी बातें

BRICS Business Forum की फैमिली फोटो में शामिल हुए PM मोदी, वैश्विक मंच पर दिखी एकजुटता

BRICS में कौन कितना ताकतवर? चीन से लेकर भारत तक, जानें कौन-कौन से देश हैं शामिल

BRICS बैठक से पहले पूर्व विदेश सलमान खुर्शीद का बयान, दुनिया की बड़ी चुनौतियों से निपटने की दी सलाह