जर्मनी के ड्रोन और यूक्रेन के राष्ट्रपति।  
विदेश

जर्मनी ने यूक्रेन को युद्ध के मैदान में दिया बड़ा 'धोखा'....तिलमिलाए जेलेंस्की ने उठाया ये कदम

German Drones: जर्मनी की सरकार की वित्तीय मदद से यूक्रेन द्वारा ड्रोन की खरीद की जा रही थी। अब खरीद रोकने के बाद सवाल खड़े हो रहे हैं। इन ड्रोन के लिए तय फंड का इस्तेमाल आगे किस उद्देश्य के लिए होगा।

रंजन कुमार

German HX-2 Strike Drones: यूक्रेन ने जर्मनी में बने एचएक्स-2 स्ट्राइक ड्रोन की खरीद रोक बंद कर दी है। युद्ध के मैदान में इन ड्रोन का प्रदर्शन तय मानकों से बेहद कमजोर रहा है। जर्मन रक्षा मंत्रालय के मुताबिक एचएक्स-2 ड्रोन को उड़ान भरने में गंभीर दिक्कतें आईं। ऐसे में केवल 25% ड्रोन टेक-ऑफ कर सके।

रिपोर्ट के मुताबिक जो ड्रोन उड़ान भरने में सफल हुए, वो भी ज्यादा देर नहीं टिक सके।

रूसी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम के सामने ये ड्रोन बेहद कमजोर साबित हुए हैं। उनसे ऑपरेटर का संपर्क टूट गया। इन ड्रोन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ऑटोनॉमी सिस्टम नहीं था, जो कनेक्शन कटने के बाद मिशन जारी रख सके। इससे एचएक्स-2 की युद्ध उपयोगिता खत्म हो गई।

जर्मन फंड से एचएक्स-2 ड्रोन खरीद रहा था यूक्रेन

यूक्रेन द्वारा एचएक्स-2 ड्रोन की यह खरीद जर्मन सरकार की फाइनेंशियल मदद से की जा रही थी। अब खरीद रोकने के बाद सवाल खड़े हो रहे। इन ड्रोन के लिए तय फंड का इस्तेमाल आगे किस उद्देश्य के लिए होगा। ड्रोन के खराब प्रदर्शन के कारण कीव ने नए ऑर्डर देने से साफ मना कर दिया है।

महंगा और असरहीन साबित

एचएक्स-2 से पहले इसका पुराना वर्जन एचएफ-1 भी महंगा और असरहीन साबित हुआ था। एचएक्स-2 को इन्हीं खामियों को दूर करने को लाया गया था, लेकिन वह भी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। यूक्रेन-रूस युद्ध में सिंगल यूज अटैक ड्रोन अहम हथियार हैं। इस मोर्चे पर रूस ने बड़ी बढ़त बनाए हुए है। उसने ईरान से मिले ड्रोन डिजाइन पर आधारित गेरान-2 जैसे ड्रोन को बड़ी संख्या में तैनात कर दिया है। 2025 के अंत में गेरान-2 ड्रोन ने चलते-फिरते लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता दिखाकर युद्ध का रुख बदलने की संभावना पैदा की थी।

जर्मन हथियारों की क्वालिटी पर उठे सवाल

एचएक्स-2 के पहले भी यूक्रेन को भेजे गए जर्मन हथियारों की क्वालिटी सवालों के घेरे में रही है। जर्मनी की सबसे आधुनिक सेल्फ प्रोपेल्ड आर्टिलरी गन पीजेडएच-2000 को 2022 में यूक्रेन भेजा गया था। मगर, हाई इंटेंसिटी लड़ाई में इसके खराब प्रदर्शन की शिकायतें आईं। जर्मन मीडिया आउटलेट डेर श्पीगल के मुताबिक डिलीवरी के एक महीने के अंदर ही खराब होने की समस्या दिखी थी। हालात ऐसे बने कि यूक्रेनी सेना को अमेरिकी एम777 हॉवित्जर जैसे ज्यादा भरोसेमंद सिस्टम पर निर्भर होना पड़ा। जर्मन सिस्टम से कम भरोसेमंद इटली की आर्टिलरी साबित हुई। यही स्थिति जर्मनी के Leopard 2A6 टैंकों के साथ दिखी, जिन्हें लेकर पश्चिमी देशों ने काफी उम्मीदें जताई थीं, लेकिन युद्ध में इन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

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