'यशार' पार्टी के नेता गादी आइसेनकोट  सोर्स: गूगल इंटरनेट।
विदेश

इजरायल में नेतन्याहू की कुर्सी पर खतरा! गादी आइसेनकोट को अरब दलों का साथ; लेकिन क्यों फंसा पेंच?

Gadi Eisenkot: इजरायल में बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता पर संकट गहराया है। पूर्व रक्षा प्रमुख आइसेनकोट को 67 सांसदों का समर्थन मिला है। हालांकि, अलग-अलग दलों को साथ लाकर सरकार बनाना बड़ी चुनौती होगी।

अमन कुमार पाण्डेय

Highlights:

  • गादी आइसेनकोट को इजरायल की 120 सदस्यीय संसद में 67 सांसदों का समर्थन मिला।

  • सैन्य सेवा से छूट का कानून नहीं बनने पर नेतन्याहू के पुराने सहयोगी UTJ ने साथ छोड़ दिया।

  • जॉइंट लिस्ट के समर्थन से आइसेनकोट मजबूत हुए, लेकिन गठबंधन में शामिल होने से उसने इनकार किया।

Israel New PM: इजरायल की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। पूर्व रक्षा प्रमुख और 'यशार' पार्टी के नेता गादी आइसेनकोट को अगली सरकार बनाने के लिए 120 सदस्यीय संसद में 67 सांसदों का समर्थन मिला है। यह सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों के बहुमत से छह अधिक है। 'द टाइम्स ऑफ इजरायल' की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग के साथ चुनाव के बाद हुई सलाह-मशविरे की प्रक्रिया में आइसेनकोट को यह समर्थन हासिल हुआ।

कैसे नेतन्याहू से आगे निकले आइसेनकोट?

आइसेनकोट को मिले समर्थन में विपक्षी दलों के अलावा अरब नेतृत्व वाला जॉइंट लिस्ट गठबंधन भी शामिल है। उनके पक्ष में यहूदी नेतृत्व वाले विपक्षी गुट की 48 सीटें, अरब पार्टी रा'अम की 8 सीटें और जॉइंट लिस्ट की 11 सीटें हैं। इस तरह उनका समर्थन बढ़कर 67 सांसदों तक पहुंच गया है।

दूसरी तरफ, बेंजामिन नेतन्याहू के दक्षिणपंथी गठबंधन को बड़ा झटका लगा है। चुनाव में उनके खेमे को कुल 53 सीटें मिली थीं, लेकिन पारंपरिक सहयोगी यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म (UTJ) ने किसी भी उम्मीदवार का समर्थन नहीं करने का फैसला किया। इसके बाद नेतन्याहू के समर्थन में केवल 46 सांसद रह गए।

नेतन्याहू से क्यों नाराज हुआ पुराना सहयोगी?

UTJ के इस फैसले के पीछे येशिवा के धार्मिक छात्रों को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट देने का मुद्दा है। पार्टी लंबे समय से नेतन्याहू सरकार से इस संबंध में कानून बनाने की मांग कर रही थी। हालांकि, यह वादा पूरा नहीं होने से पार्टी नेतृत्व नाराज है।

UTJ के दो प्रमुख धार्मिक गुटों देगेल हातोराह और अगुदात इजरायल के आध्यात्मिक नेतृत्व ने भी किसी उम्मीदवार के समर्थन से दूर रहने का निर्देश दिया। पार्टी ने राष्ट्रपति को साफ कर दिया है कि भविष्य में किसी सरकार को उसका समर्थन तभी मिलेगा, जब सैन्य सेवा से छूट सुनिश्चित की जाएगी।

67 सांसदों का समर्थन, फिर भी सरकार बनाना आसान नहीं

आइसेनकोट के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि समर्थन देने वाले सभी दल सरकार में शामिल होने के लिए तैयार नहीं हैं। जॉइंट लिस्ट ने नेतन्याहू को सत्ता में लौटने से रोकने के लिए आइसेनकोट के नाम की सिफारिश की है, लेकिन उसने स्पष्ट किया है कि वह औपचारिक रूप से उनके गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगा।

ऐसे में 67 सांसदों का समर्थन मिलने के बावजूद स्थिर सरकार बनाना आसान नहीं होगा। राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग से आइसेनकोट को सरकार बनाने का पहला मौका मिलने की उम्मीद है। हालांकि, अंतिम चुनौती अलग-अलग विचारधारा वाले दलों को एक साथ लाकर कामकाजी सरकार तैयार करने की होगी।

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