France Student Protest High Schools: फ्रांस में हाई स्कूल के छात्र पिछले एक सप्ताह से सड़कों पर उतरकर हिंसक प्रदर्शन कर रहे हैं। पेरिस क्षेत्र से शुरू हुआ यह आंदोलन अब पूरे देश में तेजी से फैल चुका है। प्रदर्शनकारी छात्र स्कूलों के गेट पर आगजनी कर पुलिस से भिड़ रहे हैं।
हिंसा के कारण शुक्रवार को देश भर में लगभग 400 हाई स्कूल बंद रहे। आंदोलन में अब तक 65 स्कूल कर्मचारी घायल हुए हैं, जिनमें 40 प्रिंसिपल शामिल हैं। सुरक्षा बलों ने 2000 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है, जिनमें 90% नाबालिग हैं।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि स्कूलों में पढ़ाई के घंटे अधिक हैं। क्लासरूम में भीषण गर्मी है और एसी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। छात्रों ने गंभीर शिकायत की है कि स्कूल शिक्षक व स्टाफ अक्सर कक्षाओं से अनुपस्थित रहते हैं।
इन्हीं गंभीर समस्याओं के विरोध में छात्र मुख्य गेट ब्लॉक कर उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं। स्कूलों को बंद कराने के लिए कई स्थानों पर मुख्य दरवाजों पर आगजनी की गई है। पुलिस से हिंसक झड़प के कारण कई इलाकों में तनाव बना हुआ है।
उग्र आंदोलन को देखते हुए प्रशासन को कड़े सुरक्षा कदम उठाने पड़ रहे हैं। दक्षिणी शहर मार्सिले में कई स्कूलों ने ऑनलाइन क्लासेस चलाने की योजना बनाई है।
शिक्षा मंत्री एडुआर्ड गेफ्रे ने कहा कि शिकायतें सही हो सकती हैं, पर हिंसा जायज नहीं। उन्होंने बीएफएमटीवी से कहा कि यह आंदोलन बेहद हिंसक गुटों के कब्जे में है। गेफ्रे अनुसार देश के 3700 हाई स्कूलों में से लगभग 400 स्कूल शुक्रवार को बंद रहे।
उन्होंने बताया कि आंदोलन की शुरुआत से अब तक 65 स्टाफ मेंबर घायल हो चुके हैं। घायलों में 40 हाई स्कूल प्रिंसिपल शामिल हैं, जो बेहद गंभीर स्थिति है। शिक्षा मंत्री ने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को प्रदर्शन में न जाने दें।
उन्होंने कहा कि सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चे सड़कों पर न रहें क्योंकि वे खतरे में हैं। प्रशासन स्थिति सामान्य बनाने और हिंसा रोकने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
न्याय मंत्री गेराल्ड डारमानिन ने वकीलों को हिंसा पर कड़ा आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि बच्चों द्वारा किए गए नुकसान की जवाबदेही माता-पिता पर तय होगी। सरकारी संपत्ति व स्कूलों के नुकसान की मरम्मत का खर्च माता-पिता से वसूला जाएगा।
डारमानिन ने आरटीएल को बताया कि अब तक 2000 लोगों को हिरासत में लिया गया है। हिरासत में लिए गए कुल लोगों में से लगभग 90 प्रतिशत लोग नाबालिग छात्र हैं। न्याय मंत्रालय के इस फैसले से उपद्रव करने वाले छात्रों के परिवारों पर शिकंजा कसेगा।
प्रशासन का मानना है कि वित्तीय जवाबदेही तय होने से हिंसक घटनाओं पर रोक लगेगी। पूरे फ्रांस में सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि दोबारा आगजनी न हो सके।