फ्रांस में सरकार के विरोध में जनता का प्रदर्शन (सोर्स- सोशल मीडिया)
विदेश

पेरिस में दिनभर विरोध और रात में जश्न जैसा नजारा, नेशन स्क्वायर पर मशालों और फ्लेयर्स से रोशन हुआ आसमान

France Protest 2026: फ्रांस में महंगाई, कम वेतन और शिक्षा बजट में कटौती के खिलाफ लाखों छात्र और कर्मचारी सड़कों पर उतरे। पेरिस झड़पों के साथ-साथ नेशन स्क्वायर पर रात में मशाल जुलूस भी निकाला गया।

अक्षय साहू

Highlights:

  • फ्रांस में महंगाई, कम वेतन और शिक्षा बजट के खिलाफ लाखों लोगों ने प्रदर्शन किया

  • पेरिस और लियोन में प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़प और आगजनी हुई

  • हड़ताल से स्कूल, सार्वजनिक परिवहन और एफिल टावर की सेवाएं भी प्रभावित हुईं

France Protests Paris 2026: फ्रांस में गुरुवार को दिनभर विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी रहा। देश के कई शहरों में छात्र, कर्मचारी और आम नागरिक अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे। इस दौरान कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव भी देखने को मिला। वहीं, रात होते ही पेरिस के नेशन स्क्वायर पर अलग ही नजारा दिखाई दिया। यहां रंग-बिरंगी झांकियां निकाली गईं और आसमान में जलती मशालों के साथ रोशनी बिखेरते फ्लेयर्स नजर आए।

गुरुवार को पेरिस के नेशन स्क्वायर पर बड़ी संख्या में लोग मशालों और झांकियों के साथ जुटे। दिनभर विरोध प्रदर्शनों के बाद रात का यह दृश्य लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान कई जगह तनाव की स्थिति भी बनी रही। पेरिस और लियोन में कुछ प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़प हुई। विरोध प्रदर्शन समाप्त होने के दौरान कुछ लोगों ने आगजनी भी की, जिसे अधिकारियों ने बाद में बुझा दिय

प्रदर्शन में शामिल लोगों की संख्या पर अलग-अलग आंकड़े

मीडिया के मुताबिक, फ्रांस के गृह मंत्रालय ने देशभर में हुए प्रदर्शनों में करीब 6 लाख लोगों के शामिल होने की जानकारी दी। दूसरी ओर, प्रदर्शन आयोजित करने वाली यूनियनों में शामिल CGT ने दावा किया कि इस आंदोलन में 16 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। इस तरह सरकार और यूनियन की ओर से जारी आंकड़ों में काफी अंतर देखने को मिला। इन विरोध प्रदर्शनों के जरिए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की गई। आंदोलन के समर्थन में कुछ सरकारी कर्मचारियों ने एक दिन की हड़ताल भी की।

फ्रांस में क्यों हो रहे प्रदर्शन?

फ्रांस में चल रहा यह आंदोलन केवल छात्रों तक सीमित नहीं है। बढ़ती महंगाई, कम वेतन और शिक्षा क्षेत्र के लिए पर्याप्त बजट नहीं मिलने से छात्र और कर्मचारी दोनों नाराज हैं। छात्रों की मांग है कि स्कूलों में सुविधाएं बेहतर की जाएं और शिक्षा पर सरकारी खर्च बढ़ाया जाए। वहीं, कर्मचारी वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी चाहते हैं।

इस विरोध आंदोलन की शुरुआत सितंबर में एक हाईस्कूल में कर्मचारियों की कमी के मुद्दे को लेकर हुई थी। शुरुआत में छात्र स्कूलों की स्थिति सुधारने और शिक्षा के लिए अधिक बजट की मांग कर रहे थे। बाद में कर्मचारी भी इस आंदोलन से जुड़ते चले गए। धीरे-धीरे इसका विस्तार हुआ और अब फ्रांस के कई शहरों में लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

स्कूलों-सार्वजनिक सेवाओं तक दिखा हड़ताल का असर

गुरुवार को हुए प्रदर्शनों और हड़ताल का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा। फ्रांस के लगभग एक तिहाई हाईस्कूल बंद रहे या वहां सामान्य रूप से कामकाज नहीं हो सका। कुछ जगहों पर छात्रों ने स्कूलों के प्रवेश मार्ग बंद कर दिए, जबकि कई संस्थानों में शिक्षक हड़ताल पर रहे। इसके अलावा कुछ इलाकों में सार्वजनिक परिवहन सेवाएं भी प्रभावित हुईं। विरोध प्रदर्शनों के चलते पेरिस का मशहूर एफिल टावर भी गुरुवार को बंद रहा।

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