होर्मुज जलडमरूमध्य (सोर्स- सोशल मीडिया) 
विदेश

Hormuz Mission: अमेरिका के बिना होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए यूरोप बना रहा है बड़ा प्लान

European Naval Mission: यूरोपीय देश Hormuz में जहाजों की सुरक्षा के लिए अमेरिका के बिना एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बना रहे हैं। इसमें फोकस समुद्र से माइंस हटाने और शांति बहाली पर होगा।

प्रिया सिंह

Independent Strategic Security Mission: अमेरिका और ईरान के बीच एक महीने से ज्यादा समय तक चले भारी संघर्ष के बाद अब यूरोपीय देश एक नई रणनीति तैयार कर रहे हैं। यूरोपीय संघ होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित करने के लिए स्वतंत्र रणनीतिक सुरक्षा मिशन शुरू करने की योजना बना रहा है। इस खास मिशन में अमेरिका को शामिल नहीं किया जाएगा और यह शांति बहाल होने के बाद ही पूरी तरह से लागू होगा। यह कदम फ्रांस और ब्रिटेन की अगुवाई में उठाया जा रहा है ताकि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर फिर से भरोसा बहाल किया जा सके।

फ्रांस और ब्रिटेन की पहल

द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन और फ्रांस की अगुवाई में यह नया प्रस्ताव बहुत ही सावधानी से तैयार किया जा रहा है। इस अंतरराष्ट्रीय गठबंधन का मुख्य उद्देश्य लड़ाई समाप्त होने के बाद समुद्री मार्गों पर व्यापारिक जहाजों के लिए भरोसा बहाल करना है। इसमें अमेरिका, इजरायल और ईरान जैसे सीधे संघर्ष में शामिल देशों को इस नए सुरक्षा गठबंधन से पूरी तरह बाहर रखा जाएगा।

मिशन का मुख्य उद्देश्य

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्पष्ट किया है कि यह यूरोपीय मिशन पूरी तरह से डिफेंसिव होगा और अमेरिकी कमांड के तहत काम नहीं करेगा। इसका बड़ा मकसद शिपिंग कंपनियों को यह भरोसा दिलाना है कि लड़ाई रुकने के बाद इस मार्ग पर वापस लौटना उनके लिए पूरी तरह सुरक्षित है। शांति बहाल होने के बाद ही इस सुरक्षा प्लान को लॉन्च किया जाएगा और इसमें ईरान तथा ओमान का सहयोग भी लिया जा सकता है।

तीन प्रमुख लक्ष्य तय

इस पूरे सुरक्षा प्लान के मुख्य रूप से तीन अहम मकसद तय किए गए हैं जिन पर आगे बहुत ही तेजी से काम किया जाएगा। पहला मकसद लॉजिस्टिक्स तैयार करना है ताकि Hormuz स्ट्रेट में फंसे सैकड़ों व्यापारिक जहाज आसानी से और सुरक्षित बाहर निकल सकें। दूसरा मकसद पानी के रास्ते में बिछाई गई माइंस को बड़े पैमाने पर हटाना और तीसरा सुरक्षित रास्ते के लिए नेवल एस्कॉर्ट्स तैनात करना है।

माइनिंग हटाने की चुनौती

रक्षा विश्लेषकों का यह साफ मानना है कि समुद्र में बिछी माइंस को हटाने के इस बेहद जरूरी और बड़े काम में बहुत ज्यादा समय लगेगा। यूरोप के पास अमेरिका के मुकाबले माइंस हटाने की ऐसी बहुत ज्यादा और अच्छी तकनीकी क्षमता पहले से ही मौजूद है। यूरेशिया समूह के मुजतबा रहमान के अनुसार व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत एस्कॉर्ट सिस्टम की बहुत सख्त जरूरत पड़ेगी।

अमेरिका से बढ़ते मतभेद

यह नया समुद्री प्रस्ताव यूरोप और वाशिंगटन के बीच लगातार बढ़ते हुए भारी कूटनीतिक मतभेदों के बीच दुनिया के सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जबरदस्ती Hormuz स्ट्रेट को खोलने की अपील की थी जिसका यूरोपीय नेताओं ने कड़ा विरोध किया था। यूरोपीय देशों को डर है कि अमेरिका के इस आक्रामक कदम से व्यापारिक जहाजों को मिसाइल का बहुत ही गंभीर खतरा हो सकता है।

भारत और चीन की भूमिका

इस खास योजना से जुड़े अधिकारियों ने बताया है कि इस अहम बातचीत के लिए चीन और भारत को भी विशेष रूप से बुलाया गया है। हालांकि अभी तक यह बिल्कुल साफ नहीं हो सका है कि वे इस नए अंतरराष्ट्रीय समुद्री गठबंधन का हिस्सा बनेंगे या नहीं। Hormuz स्ट्रेट दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल ले जाता है इसलिए इसकी रुकावट भारत जैसे बड़े इंपोर्टर को बहुत ज्यादा प्रभावित करती है।

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