Earthquake in Afghanistan: अफगानिस्तान में शनिवार देर रात 4.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिसकी जानकारी नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) ने दी। एजेंसी के अनुसार, यह भूकंप भारतीय समयानुसार रात 10:43 बजे आया और इसकी गहराई लगभग 82 किलोमीटर मापी गई। भूकंप का केंद्र देश के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में स्थित था। गहराई अधिक होने के कारण इसका प्रभाव सीमित रहा, लेकिन लगातार आ रहे झटकों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
इसी दिन सुबह भी अफगानिस्तान में 4.5 तीव्रता का एक और भूकंप आया था, जिसकी गहराई करीब 130 किलोमीटर बताई गई थी। एक ही दिन में दो बार भूकंप आने से स्थानीय प्रशासन और नागरिकों में सतर्कता बढ़ गई है।
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों का कहना है कि अफगानिस्तान प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, भूस्खलन और बाढ़ के प्रति अत्यंत संवेदनशील है। लंबे समय से जारी संघर्ष, कमजोर बुनियादी ढांचा और सीमित संसाधनों के कारण यहां के लोगों के लिए आपदाओं से उबरना चुनौतीपूर्ण होता है।
भूकंप पृथ्वी की सतह के नीचे मौजूद टेक्टोनिक प्लेट्स की हलचल के कारण आते हैं। पृथ्वी के अंदर कई बड़ी प्लेट्स होती हैं, जो लगातार गतिशील रहती हैं। जहां ये प्लेट्स आपस में टकराती या रगड़ खाती हैं, उस क्षेत्र को फॉल्ट लाइन कहा जाता है। समय के साथ इन प्लेट्स पर दबाव बढ़ता जाता है और जब यह दबाव अधिक हो जाता है, तो प्लेट्स अचानक खिसक जाती हैं। इसी प्रक्रिया में ऊर्जा का उत्सर्जन होता है, जो भूकंप के रूप में महसूस किया जाता है।
भूकंप का केंद्र या एपीसेंटर वह स्थान होता है, जहां से ऊर्जा का उत्सर्जन शुरू होता है। इस स्थान के आसपास कंपन सबसे अधिक महसूस होता है और दूरी बढ़ने के साथ इसका प्रभाव कम हो जाता है। यदि भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7 या उससे अधिक हो, तो इसका असर 40 किलोमीटर या उससे अधिक क्षेत्र तक गंभीर हो सकता है।
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भूकंप की तीव्रता को रिक्टर स्केल पर मापा जाता है, जिसे रिक्टर मैग्नीट्यूड स्केल भी कहा जाता है। इस पैमाने पर 1 से 9 तक भूकंप की तीव्रता दर्ज की जाती है, जिससे उसकी ताकत और संभावित नुकसान का अनुमान लगाया जाता है।