Iran Drone Attack US Consulate Dubai: ईरान की स्पेशल फोर्स इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) अमेरिका और उसके मध्यपूर्व में स्थित ठिकानों पर लगातार हमले कर रही है। यह श्रृंखला ईरान के सुप्रीम नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मौत के बाद की गई कार्रवाई का हिस्सा मानी जा रही है। हाल के दिनों में अमेरिकी कूटनीतिक मिशनों पर ड्रोन और मिसाइल हमले तेज हो गए हैं।
मंगलवार, 3 मार्च की देर रात दुबई में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास (यूएस कॉन्सुलेट) के पास ड्रोन हमले के कारण आग लग गई। स्थानीय लोगों ने जोरदार धमाके की आवाज सुनी और आग की लपटें देखी। पुलिस ने आसपास की सड़कें बंद कर दी और लोग मौके से हटाए गए। दुबई मीडिया ऑफिस ने पुष्टि की कि आग पर तुरंत नियंत्रण पा लिया गया और किसी के घायल होने की खबर नहीं है। सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों में कॉन्सुलेट के बाहर मोबाइल फायर एक्सटिंग्विशर गाड़ी खड़ी दिखाई दी।
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ड्रोन गलती से एक बिल्डिंग के पास पार्किंग में गिरा और आग लग गई, लेकिन सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं। स्थानीय लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो में अमेरिकी कॉन्सुलेट की इमारत के पीछे से उठते काले धुएं के बादल देखे गए।
इससे पहले सोमवार और मंगलवार को कुवैत और रियाद में अमेरिकी दूतावासों पर भी हमले हुए। रियाद में मंगलवार तड़के दो ड्रोन हमलों के कारण दूतावास में छोटी आग लगी, जिससे इमारत को मामूली नुकसान हुआ। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की। कुवैत में सोमवार को अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबरें आईं, जिसके बाद दूतावास ने सुरक्षा चेतावनी जारी की और लोगों को पास न आने को कहा।
मध्यपूर्व में अमेरिका के इन कूटनीतिक मिशनों को निशाना बनाने की घटनाओ के चलते क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट जारी है। दुबई प्रशासन ने सभी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई है और आग पर नियंत्रण के तुरंत बाद राहत कार्य शुरू किया गया। इस घटना ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है, क्योंकि ईरान लगातार अमेरिकी ठिकानों पर अपने प्रतिशोध के इरादे दिखा रहा है।
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यह श्रृंखला दिखाती है कि ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमले अमेरिकी और उनके सहयोगी देशों के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं, जबकि सुरक्षा बल लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। कुल मिलाकर, दुबई, कुवैत और रियाद में अमेरिकी दूतावासों पर हमलों की यह श्रृंखला क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक स्थिरता के लिए गंभीर चेतावनी है।