ईरान से जंग: नेतन्याहू या ट्रंप, किसने किसको युद्ध में धकेला? अमेरिका और इजरायल के अलग-अलग दावे

US Israel Iran Conflict: ईरान-इजरायल युद्ध के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दावा किया कि इजरायल ने अमेरिका को जंग में शामिल होने के लिए मजबूर किया, जबकि नेतन्याहू ने इसे नकारा है।
US-Israel Conflict with Iran: Who Pushed Whom Into War? Netanyahu and Rubio Disagree
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Trump Netanyahu Iran War Strategy: ईरान के खिलाफ जारी अमेरिका और इजरायल की सैन्य जंग अब एक ऐसे मोड़ पर आ गई है जहां कई बड़े सवाल उठ रहे हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक बयान देकर इस पूरी सैन्य कार्रवाई के पीछे की असली मंशा पर नई बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि क्या इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के उतावलेपन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को युद्ध के लिए मजबूर कर दिया? इस बीच इजरायल ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज करते हुए ट्रंप को एक स्वतंत्र और बहुत मजबूत नेता बताया है।

अमेरिकी विदेश मंत्री का बड़ा दावा

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने वॉशिंगटन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा सार्वजनिक किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को पहले से पता था कि इजरायल किसी भी हाल में ईरान पर हमला करने की पूरी तैयारी कर चुका है। ऐसे में अमेरिकी सैनिकों पर संभावित ईरानी हमलों को देखते हुए ट्रंप सरकार को इस जंग में सक्रिय रूप से कूदना ही पड़ा। रुबियो का तर्क है कि अगर अमेरिका इजरायल के साथ मिलकर पहले हमला नहीं करता तो ईरान की प्रतिक्रिया बहुत भयानक होती। इससे खाड़ी क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों और ठिकानों को जान-माल का बहुत अधिक नुकसान झेलना पड़ सकता था। इसी संभावित खतरे को भांपते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने दुश्मन के ठिकानों पर पहले हमला करने का एक कठिन सैन्य फैसला लिया।

इजरायली प्रधानमंत्री का कड़ा पलटवार

जब इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से पूछा गया कि क्या उन्होंने अमेरिका को इस युद्ध में घसीटा है, तो वे हंसने लगे। नेतन्याहू के अनुसार डोनाल्ड ट्रंप दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेता हैं और वे केवल वही करते हैं जो अमेरिका के लिए सही है। उनका मानना है कि कभी-कभी खुद को विनाश से बचाने के लिए युद्ध ही एकमात्र रास्ता और बहुत जरूरी विकल्प बचता है।

युद्ध का बढ़ता दायरा और तबाही

ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच छिड़ी यह भीषण जंग अब अपने चौथे दिन में प्रवेश कर चुकी है और तेजी से फैल रही है। ईरान ने दावा किया है कि उसने बहरीन में अमेरिका के एक मुख्य एयर बेस को ड्रोन और मिसाइलों से पूरी तरह तबाह कर दिया है। सऊदी अरब की सबसे बड़ी अरामको रिफाइनरी पर भी ईरानी हमलों के निशान सैटेलाइट तस्वीरों में साफ तौर पर देखे जा रहे हैं।

आम जनता और उड़ानों पर संकट

इस अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का सीधा असर अब दिल्ली एयरपोर्ट पर भी दिख रहा है जहां आज लगभग 80 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। मिडिल ईस्ट में उड़ान संकट इतना गहरा गया है कि पिछले 4 दिनों में 7 देशों के एयरपोर्ट्स पर 9,500 उड़ानें कैंसिल हुई हैं। स्पाइसजेट जैसी विमानन कंपनियां अब यूएई में फंसे भारतीयों को सुरक्षित घर वापस लाने के लिए विशेष उड़ानों का संचालन करेंगी।

सुरक्षा मोर्चे पर बड़ी कामयाबी

यूएई ने अपनी रक्षा प्रणाली के जरिए 148 ड्रोन और कई मिसाइलों को मार गिराकर सुरक्षा के मोर्चे पर एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। दुबई में फंसी भारतीय बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु भी इस तनावपूर्ण माहौल के बीच सुरक्षित वतन वापस लौटकर काफी खुश नजर आईं। युद्ध की इस आग ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को झुलसा कर रख दिया है और शांति की उम्मीदें फिलहाल बहुत कम दिखाई दे रही हैं।

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