होर्मुज जलमार्ग  (सोर्स- सोशल मीडिया)
विदेश

Donald Trump के होर्मुज पर दावे को लेकर ईरान ने उड़ाया मजाक, कहा- 7000 मील दूर से देख रहे हैं ख्वाब

Donald Trump Mocked: होर्मुज जलमार्ग पर अमेरिकी दावे का मजाक उड़ाते हुए ईरान ने कहा कि इसे फिर से खोलने में वाशिंगटन की विफलता और दावे के बीच की दूरी 7,000 मील के फासले से भी बहुत अधिक है।

प्रिया सिंह

US Iran War Donald Trump Hormuz Dispute: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज जलमार्ग पर किए गए दावे के बाद कड़ा भू-राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण रास्ते को अमेरिका का नया इलाका घोषित कर दिया था, जिस पर ईरान ने अब बेहद तीखी और कड़ाई से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

दरअसल, ईरान की सर्वोच्च सुरक्षा परिषद के नए सचिव मोहसेन रेज़ाई ने ट्रंप की इस घोषणा का खुलकर मजाक उड़ाया है। उन्होंने कहा कि इस रणनीतिक समुद्री रास्ते को फिर से खोलने में वाशिंगटन की विफलता और उस पर अपना अधिकार जताने के बीच का अंतर 7,000 मील के फासले से भी कहीं बहुत अधिक है।

ट्रंप के दावे और ईरान का पलटवार

अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के साथ रेजाई ने दुनिया के नक्शे की एक तस्वीर भी साझा की और मजाकिया अंदाज में लिखा कि कुछ सपने वास्तविकता से बहुत दूर होते हैं। उन्होंने फारस की खाड़ी में अमेरिकी दबदबे के बाद के दौर में उनका स्वागत किया और ट्रंप के दावे को कड़ा झटका दिया।

बता दें कि ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक विवादास्पद नक्शा पोस्ट किया था जिसमें होर्मुज जलमार्ग को नया अमेरिकी क्षेत्र बताया गया है। इसके साथ ही उन्होंने इस कड़े जलमार्ग पर कब्जा करने की अपनी हालिया कूटनीतिक धमकी को दोहराया, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई है।

होर्मुज जलमार्ग का वैश्विक महत्व

होर्मुज जलमार्ग पूरी दुनिया में कच्चे तेल की सुगम आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रूट माना जाता है। आम तौर पर दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने इस रास्ते को पूरी तरह बंद कर रखा है।

इसके कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग में गंभीर रुकावट आ रही है और दुनिया भर में तेल की आपूर्ति पर कड़ा संकट मंडरा रहा है। ईरान का कहना है कि वह इस जलमार्ग को तब तक नहीं खोलेगा जब तक कि अमेरिका उसकी सभी मांगें पूरी नहीं कर देता, जिससे गतिरोध काफी कड़ा हो गया है।

सऊदी और कतर की कूटनीति

ईरान की मुख्य मांगों में उनके बंदरगाहों की नाकाबंदी समाप्त करना, तेल निर्यात पर लगे कड़े प्रतिबंध हटाना और जब्त की गई संपत्ति को जारी करना शामिल है। इसके अलावा वे युद्ध क्षतिपूर्ति के रूप में कड़े हर्जाने की मांग कर रहे हैं, जिसे पूरा करने को अमेरिका तैयार नहीं है।

दूसरी तरफ कतर के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि वह इस जलमार्ग को दोबारा खोलने के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच समझौता देखना चाहता है। कतर का मानना है कि ऐसे किसी कड़े समझौते से दोनों देशों के बीच बातचीत फिर से शुरू करना आसान हो जाएगा और शांति स्थापित होगी।

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