डोनाल्ड ट्रंप, शी जिनपिंग (सोर्स- सोशल मीडिया) 
विदेश

ट्रंप ने लगाया परमाणु परीक्षण का आरोप...तो भड़के चीन ने लगाई अमेरिका की क्लास, कही ये बात

China Nuclear Test: अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन और रूस पर भूमिगत परमाणु परीक्षण का आरोप लगाया; चीन ने इसे खारिज करते हुए कहा कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल रक्षात्मक और जिम्मेदार है।

अक्षय साहू

China Denies Trump Nuclear Test Claim: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया कि चीन और रूस भूमिगत परमाणु परीक्षण कर रहे हैं। इस पर चीन की ओर से पहली प्रतिक्रिया आई है। चीनी विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के दावे को खारिज करते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय ने कहा कि चीन एक जिम्मेदार परमाणु-संपन्न देश है।

विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने बताया कि चीन हमेशा शांतिपूर्ण विकास के मार्ग पर रहा है और नो फर्स्ट यूज नीति के तहत न्यूक्लियर हथियारों का उपयोग केवल रक्षात्मक उद्देश्यों के लिए करता है। उन्होंने कहा कि चीन अंतरराष्ट्रीय समझौतों का सम्मान करता है और सभी न्यूक्लियर परीक्षणों को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।

ट्रंप ने लगाया था आरोप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक मीडिया इंटरव्यू में कहा था कि रूस और चीन जैसे देश भूमिगत परमाणु परीक्षण कर रहे हैं, लेकिन इसके बारे में जनता को जानकारी नहीं होती। उन्होंने अमेरिका की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका अकेला ऐसा देश नहीं होना चाहिए जो परीक्षण न करे। उन्होंने आगे कहा,रूस परीक्षण कर रहा है, चीन परीक्षण कर रहा है, लेकिन वे इसके बारे में नहीं बताते। उन्होंने परमाणु परीक्षण करने वाले देशों में उत्तर कोरिया और पाकिस्तान का भी नाम लिया। ट्रंप ने कहा, हमारे पास सबसे अधिक परमाणु हथियार हैं और मुझे लगता है कि हमें परमाणु निरस्त्रीकरण पर कदम उठाने चाहिए। मैंने इस विषय पर राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति शी के साथ चर्चा भी की है।

दुनिया को 150 बार खत्म करने की झमता

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका के पास किसी भी अन्य देश से ज्यादा परमाणु हथियार हैं। उनके अनुसार, अमेरिका के पास दुनिया को 150 बार पूरी तरह से नष्ट करने के लिए पर्याप्त परमाणु हथियार हैं। उन्होंने रूस और चीन के परमाणु शस्त्रागार का जिक्र करते हुए कहा कि रूस और चीन के पास भी बहुत सारे परमाणु हथियार हैं।

इस दैरान ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया कि मई में भारत और पाकिस्तान लगभग न्यूक्लियर वॉर की तरफ बढ़ रहे थे, और उन्होंने ट्रेड और टैरिफ का इस्तेमाल करके इसे रोक दिया। उन्होंने कहा कि अगर उन्होंने दखल नहीं दिया होता तो लाखों लोग मारे गए होते।

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