कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो 
विदेश

आतंकवादियों को बचाने का कनाडा का लंबा है रिकॉर्ड, कनाडाई पत्रकार ने ट्रूडो सरकार पर किया ये खुलासा

भारत और कनाडा के तनाव के बीच दोनों देशों की मडिया और विदेश नीति के जानकारों की भी प्रतिक्रिया सामने आने लगी है। भारत और कनाडा के बीच की कार्रवाई को वे किस तरह से देखते हैं। इस पर उन्होंने खुलकर बातें की हैं। तो वहीं कनाडाई पत्रकार की बात करें तो जस्टिन ट्रूडो की आलोचना की है। कनाडाई पत्रकार ने ट्रूडो सरकार पर कई खुलासा भी किया है, तो वहीं विदेश नीति के जानकार ने कनाडा के आतंकवादियों के बचाने का काला चिट्ठा बयां किया है।

साक्षी सिंह

टोरंटो: भारत और कनाडा के तनाव के बीच दोनों देशों की मडिया और विदेश नीति के जानकारों की भी प्रतिक्रिया सामने आने लगी है। भारत और कनाडा के बीच की कार्रवाई को वे किस तरह से देखते हैं। इस पर उन्होंने खुलकर बातें की हैं। तो वहीं कनाडाई पत्रकार की बात करें तो जस्टिन ट्रूडो की आलोचना की है। कनाडाई पत्रकार ने ट्रूडो सरकार पर कई खुलासा भी किया है, तो वहीं विदेश नीति के जानकार ने कनाडा के आतंकवादियों के बचाने का काला चिट्ठा बयां किया है।

कनाडाई पत्रकार बोर्डमैन ने भारत के साथ बढ़ते तनाव के बीच कहा कि जस्टिन ट्रूडो विश्वसनीय नहीं हैं। तो वहीं पत्रकार अनिल श्रृंगी ने कनाडा सरकार द्वारा छह भारतीय राजनयिकों को निष्कासित किए जाने को वोट बैंक कार्रवाई बताया।

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कनाडाई पत्रकार डैनियल बोर्डमैन कहते हैं, ट्रूडो की पार्टी को हाल ही में एक विशेष चुनाव में अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा और एक और कार्यकाल हासिल करने की उनकी संभावना कितनी कम है।अगले चुनाव में लिबरल्स को धूल चटा दी जाएगी। कंजर्वेटिव्स सुपरमैजोरिटी की ओर बढ़ रहे हैं। कुछ सर्वेक्षणों में कंजर्वेटिव्स को चौथी पार्टी बनने का अनुमान भी लगाया गया है।

ट्रूडो सरकार से तंग आ चुके हैं कनाडाई

कनाडा से उच्चायुक्त और अन्य लक्षित राजनयिकों और अधिकारियों को वापस बुलाने के भारत सरकार के फैसले पर डैनियल बोर्डमैन कहते हैं, खालिस्तानी तंत्र के भीतर कुछ तत्व हैं, वे हर जगह मौजूद हैं। खालिस्तानी तत्व पूरी तरह से हमलावर मोड में हैं। वे इसे पूरी जीत के रूप में ले रहे हैं और भारत की आलोचना कर रहे हैं। बोर्डमैन ने कहा, कनाडा के अधिकांश लोग इस सरकार से बेहद तंग आ चुके हैं। संस्थाओं पर भरोसा नहीं करते। मीडिया भी जस्टिन ट्रूडो को विश्वसनीय नहीं मानते। बहुत से कनाडाई इसे देखेंगे, कंधे उचकाएंगे और शायद भारत का पक्ष भी लेंगे।

कनाडा को दिलाई याद

अमेरिका स्थित विदेश नीति विशेषज्ञ ने कहा कि कनाडा के साथ भारत के बिगड़ते रिश्ते पाकिस्तान के साथ संबंधों की याद दिलाते हैं। वहीं भारत स्थित विदेश नीति के जानकार ब्रह्म चेलानी ने कहा कि भारत-कनाडा संबंध पहले से ही अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं, अब दोनों पक्षों ने छह राजनयिकों को निष्कासित कर दिया है। संबंधों को खराब करने वाला मुख्य मुद्दा सिख आतंकवादियों को बचाने का कनाडा का लंबा रिकॉर्ड है, जो 1985 में कनाडा में हुए एयर इंडिया बम विस्फोटों से बहुत कम सीखता है, जिसमें 331 लोग मारे गए थे।

क्या है तनाव की वजह

दरअसल, कनाडा सरकार का दावा है कि भारत घोषित आतंकवादी खालिस्तानी निज्जर हत्या मामले में भारतीय उच्चायुक्त और अन्य राजनायिक की संलिप्तता पाई गई है। कनाडा ने राजनायिक सूचना रविवार को भारत को दी। भारत ने इसे पूरी तरह बेबुनियाद और अस्वीकार बताया। वहीं कनाडा का ये भी आरोप है कि निज्जर हत्या मामले में भारत जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। इन सबके बीच दोनों देशों ने एक दूसरे के देश में रह रहे राजनायिकों को निर्वासन नोटिस दे दिया। अब ये तनाव तूल पकड़ता जा रहा है।

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