ब्रिटेन में बीयर चिकन संकट, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

ब्रिटेन में बीयर और चिकन पर मंडराया बड़ा संकट! होर्मुज तनाव ने उड़ाई सरकार की नींद, जानें क्या है पूरा मामला

Britain Beer Chicken Crisis: ब्रिटेन सरकार होर्मुज में जारी तनाव के कारण संभावित CO2 की कमी से निपटने के लिए गुप्त आपातकालीन योजनाएं बना रही है, जिससे बीयर और खाद्य आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

अमन उपाध्याय

Britain Beer Chicken Crisis Hormuz Strait Tensions: फुटबॉल विश्व कप शुरू होने में अब कुछ ही हफ्ते बचे हैं, लेकिन ब्रिटेन में बीयर प्रेमियों और आम नागरिकों के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, विशेष रूप से Strait of Hormuz के आसपास के घटनाक्रमों ने ब्रिटेन की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को खतरे में डाल दिया है।

इसके परिणामस्वरूप, देश में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की भारी कमी होने की संभावना है, जो बीयर से लेकर सुपरमार्केट में मिलने वाले चिकन तक हर चीज को प्रभावित कर सकती है।

क्या है CO2 संकट?

आमतौर पर लोग कार्बन डाइऑक्साइड को केवल बीयर में झाग या कोल्ड ड्रिंक्स में फिज (Fizz) पैदा करने वाली गैस के रूप में जानते हैं, लेकिन ब्रिटेन की खाद्य और स्वास्थ्य प्रणाली के लिए यह गैस अत्यंत महत्वपूर्ण है। मांस प्रसंस्करण उद्योग में इसका उपयोग वध से पहले सूअरों और मुर्गियों को बेहोश करने के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त, मांस, सलाद और बेकरी उत्पादों की पैकेजिंग में CO2 का उपयोग उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए किया जाता है ताकि उत्पाद लंबे समय तक ताजे रहें। इस गैस की कमी का असर केवल खाने-पीने की चीजों तक सीमित नहीं है। अस्पतालों में कई महत्वपूर्ण शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं (Surgical Procedures) और एमआरआई (MRI) स्कैन के लिए भी CO2की आवश्यकता होती है। साथ ही, ऊर्जा क्षेत्र के कुछ हिस्से शीतलन प्रणालियों (Cooling Systems) के लिए इस पर निर्भर करते हैं।

सरकार की गुप्त तैयारी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटेन सरकार की आपातकालीन समिति 'कोबरा' (COBRA) वर्तमान में 'एक्सरसाइज टर्नस्टोन' (Exercise Turnstone) नामक एक आकस्मिक अभ्यास कर रही है। इस अभ्यास के तहत सरकार उस स्थिति का सामना करने की तैयारी कर रही है जिसमें यदि होर्मुज जून तक बंद रहता है और उसी दौरान अमेरिका एवं ईरान के बीच तनाव बना रहता है तो देश की अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा। यह योजना विशेष रूप से तब और गंभीर हो जाती है जब ब्रिटेन के प्रमुख CO2 उत्पादन संयंत्रों में से किसी एक में तकनीकी खराबी आ जाए।

आम उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?

यदि कार्बन डाइऑक्साइड की आपूर्ति में लंबे समय तक कमी बनी रहती है तो उपभोक्ताओं को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। सुपरमार्केट की अलमारियों से चिकन और सूअर के मांस के पैकेट गायब हो सकते हैं या उनकी कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। बीयर और अन्य कार्बोनेटेड पेय पदार्थों की आपूर्ति बाधित होने से पब और रेस्तरां में भी किल्लत देखी जा सकती है। विश्व कप के दौरान पबों में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए यह संकट और भी गहरा महसूस हो सकता है।

सरकार का आधिकारिक रुख

फिलहाल ब्रिटेन के व्यापार सचिव पीटर काइल ने जनता को आश्वस्त करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा है कि वर्तमान में CO2 की आपूर्ति अर्थव्यवस्था के लिए तत्काल चिंता का विषय नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है और यदि हालात बिगड़ते हैं तो उचित घोषणाएं की जाएंगी। पर्दे के पीछे चल रही 'एक्सरसाइज टर्नस्टोन' जैसी तैयारी यह दर्शाती है कि प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति के लिए खुद को तैयार रखना चाहता है।

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