Brazil Betting Ban Election Decision: ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव के पहले चरण से महज कुछ दिन पहले बड़ा राजनीतिक फैसला सामने आया है। राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने देश भर में फिक्स्ड-ऑड्स स्पोर्ट्स बेटिंग पर तत्काल रोक लगाने का ऐलान किया है।
सरकार का तर्क है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी की वजह से अनगिनत परिवार बर्बाद हो रहे हैं और लोग भारी कर्ज के जाल में फंस रहे हैं। इस गंभीर संकट से निपटने के लिए राष्ट्रपति लूला ने कार्यकारी आदेश जारी कर सट्टेबाजी के संचालन और विज्ञापनों पर पाबंदी लगा दी है।
लूला दा सिल्वा ने शुक्रवार को अस्थायी कार्यकारी आदेश पर दस्तखत किए। इसके तहत फिक्स्ड-ऑड्स सट्टेबाजी के संचालन, विज्ञापन और मध्यस्थता पर रोक लगाई गई है। यह सख्त पाबंदी ब्राजील में तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
हालांकि इस पाबंदी को स्थायी बनाए रखने के लिए 120 दिनों में कांग्रेस की मंजूरी लेनी होगी। आदेश के अनुसार सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म पर नए पैसे जमा करने पर तुरंत रोक लगा दी गई है। मौजूदा उपयोगकर्ताओं को खातों से रकम निकालने के लिए 5 अक्टूबर तक का समय दिया गया है।
6 अक्टूबर से सभी सट्टेबाजी ऐप और वेबसाइटों को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। इसके बाद बैंक और वित्तीय संस्थान उपयोगकर्ताओं की बची हुई रकम वापस लौटाने का काम करेंगे।
यह फैसला इसलिए अहम है क्योंकि 4 अक्टूबर को राष्ट्रपति चुनाव का पहला चरण होना है। लूला खुद दोबारा चुनाव मैदान में हैं और जनता से समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं। उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो हैं।
फ्लावियो बोल्सोनारो ने इस पाबंदी को चुनावी हथकंडा करार देकर सरकार पर हमला बोला है। साओ पाउलो में पत्रकारों से बात करते हुए लूला ने इसे बेहद जरूरी फैसला बताया। उन्होंने ऑनलाइन सट्टेबाजी की तुलना शरीर में फैल रहे कैंसर ट्यूमर से की।
लूला ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी सट्टेबाजी पर गहरी चिंता जताई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार सट्टेबाजी पर रोक के इस फैसले को जनता का व्यापक समर्थन मिल रहा है।
ब्राजील में फिक्स्ड-ऑड्स स्पोर्ट्स बेटिंग को पहली बार 2018 में कानूनी मान्यता मिली थी। लूला दा सिल्वा कार्यकाल में इस बाजार को नियंत्रित कर कंपनियों को 85 लाइसेंस जारी किए गए थे। इन कंपनियों से सरकार को लाइसेंस शुल्क के तौर पर कुल 2.55 अरब रियाल मिले थे।
सट्टेबाजी के विज्ञापनों ने फुटबॉल और प्रमुख खेल आयोजनों पर भी कब्जा जमा लिया था। अचानक लगी इस पाबंदी से सट्टेबाजी उद्योग को भारी आर्थिक झटका लगा है। उद्योग संगठनों ने सरकार के इस फैसले को अदालत में चुनौती देने के संकेत दिए हैं।
उनका कहना है कि कानूनी ढांचे के तहत दिए गए लाइसेंस खत्म करने पर मुआवजे का सवाल उठेगा। वहीं सरकार अब सट्टेबाजी को बढ़ावा देने वालों को अपराधी घोषित करने वाला विधेयक ला रही है।