Bangladesh Ram Statue Controversy: बांग्लादेश के गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी में स्थित श्री श्री राधा गोविंदा और काली मंदिर में भगवान राम की दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा बनाने का काम रोक दिया गया है। इस भव्य प्रोजेक्ट के तहत भगवान राम की 81 फीट, भगवान कृष्ण की लगभग 50 फीट और शिव जी की 30 फीट ऊंची मूर्ति बनाई जा रही थी। इस्लामी कट्टरपंथी समूहों के भारी दबाव और लगातार विरोध के कारण मंदिर समिति को अचानक यह बड़ा निर्माण कार्य रोकना पड़ा है। इससे अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय में अपनी सुरक्षा और धार्मिक आजादी को लेकर गहरी चिंता और भारी आक्रोश पैदा हो गया है।
हिंदू समुदाय के लिए एक बड़ा केंद्र बनाने के इस अहम प्रोजेक्ट में करीब 22 करोड़ बांग्लादेशी टका की भारी लागत लगनी थी। लेकिन अब इस पवित्र निर्माण के रुकने से पूरे देश में एक नया विवाद और बहुत बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन ने भी इस पूरी घटना पर चिंता जताते हुए अल्पसंख्यकों की धार्मिक आजादी पर कई बड़े सवाल खड़े किए हैं। वहीं कूटनीतिक मोर्चे पर तारिक रहमान ने नेपाल को 1,750 किलो आम भेजे हैं लेकिन दिल्ली के साथ उनका तनाव अभी भी जारी है।
मूर्ति निर्माण रुकने और भगवान राम के अपमान के विरोध में ढाका यूनिवर्सिटी के हिंदू छात्रों ने एक विशाल विरोध रैली निकाली। गुस्साए छात्रों ने शाहबाग चौराहे पर पहुंचकर सड़क जाम कर दी और अपना कड़ा विरोध जताते हुए आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है। छात्र नेता राम प्रसाद साहा ने अपने संबोधन में स्पष्ट कहा कि कुछ चरमपंथी समूह जानबूझकर अफवाहें फैलाकर धार्मिक तनाव भड़काने की साजिश कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का साफ कहना है कि राम उनके लिए एक बड़े अवतार हैं और उनकी तस्वीर का अपमान बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होगा। छात्र नेता सुदीप्त प्रमाणिक ने सरकार को सीधी चेतावनी दी है कि अगर आरोपियों पर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले शुक्रवार को बड़ा आंदोलन होगा। छात्रों ने प्रशासन को याद दिलाया कि चुनाव से पहले अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए किए गए कई वादे अभी तक पूरे नहीं हुए हैं।
मंदिर के सलाहकार श्यामलाल कुमार महंता ने बताया कि देश की कानून-व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव को बनाए रखने के लिए फिलहाल यह फैसला लिया गया है। समिति अपनी तरफ से किसी भी तरह के धार्मिक विवाद का हिस्सा बिल्कुल नहीं बनना चाहती और न ही किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना चाहती है। हालांकि सनातन धर्म के लोगों का सीधा आरोप है कि कट्टरपंथी समूह शुरुआत से ही इस निर्माण कार्य में लगातार कई तरह की रुकावटें डाल रहे थे।
इस पूरे विवाद पर लेखिका तस्लीमा नसरीन ने तीखा सवाल पूछा है कि जब देश में नई मस्जिदें बन रही हैं तो राम मंदिर पर इतना विरोध क्यों है। उन्होंने धमकियों और नफरत के इस खतरनाक माहौल को देश के भविष्य के लिए बेहद चिंताजनक और पूरी तरह से गलत बताया है। यह पूरी घटना स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के मूल अधिकारों और सुरक्षा को लेकर अभी भी कई गंभीर और बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं।