द अनफिनिश्ड मेमोयर्स (सोर्स- सोशल मीडिया)
विदेश

बंगबंधु की किताब बेचने पर भड़का विवाद, बांग्लादेश में पब्लिशिंग हाउस के कर्मियों को मिली धमकी

Bangladesh Publishing Crisis: ढाका में 'द अनफिनिश्ड मेमोयर्स' बेचने पर UPA के कर्मियों को परेशान किया गया। BNP कार्यकर्ताओं की इस हरकत की प्रबुद्ध नागरिकों ने निष्पक्ष जांच की मांग की।

प्रिया सिंह

Bangladesh Publishing Freedom Crisis: बांग्लादेश में अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। ढाका के मशहूर पब्लिशिंग हाउस 'यूनिवर्सिटी प्रेस लिमिटेड' (UPA) के कर्मियों से बदसलूकी की गई। बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की प्रसिद्ध किताब 'द अनफिनिश्ड मेमोयर्स' बेचने पर यह विवाद हुआ।

स्थानीय BNP कार्यकर्ताओं पर पब्लिशिंग हाउस के दो कर्मचारियों को परेशान करने का आरोप लगा है। कार्यकर्ताओं ने आउटलेट का शटर बंद कराया और कर्मचारियों को जबरन पुलिस चौकी ले गए। इस घटना के बाद बांग्लादेश में प्रकाशकों की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल उठ रहे हैं।

UPA आउटलेट पर शटर गिराने और कर्मचारियों से बदसलूकी की घटना

ढाका के सूत्रपुर इलाके में यूनिवर्सिटी प्रेस लिमिटेड के आउटलेट पर यह दुखद घटना घटी। रिपोर्टों के अनुसार दो युवक बंगबंधु शेख मुजीब की किताब 'द अनफिनिश्ड मेमोयर्स' खरीदने आए थे।

किताब देखने के बाद दोनों युवकों ने दावा करना शुरू कर दिया कि यह किताब प्रतिबंधित है। उन्होंने शोरूम में मौजूद सेल्स कर्मचारियों से किताब बेचने को लेकर जबरन सफाई मांगी। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि 'द अनफिनिश्ड मेमोयर्स' पर सरकार या कानून की रोक नहीं है।

इसके बावजूद दोनों युवकों ने जबरन आउटलेट का शटर नीचे गिरा दिया और भीड़ जुटा ली। आरोपियों ने दो सेल्स कर्मियों को परेशान किया और जबरन पकड़कर पुलिस स्टेशन ले गए। पुलिस ने बताया कि शामिल लोग स्थानीय BNP कार्यकर्ता थे और बाद में कर्मियों को छोड़ दिया गया।

पुलिस का बयान और पब्लिशिंग हाउस की कड़ी प्रतिक्रिया

सूत्रपुर थाना प्रभारी मतिउर रहमान ने बताया कि UPA लंबे समय से इस किताब का प्रकाशन कर रहा है। कर्मचारी पुराने संस्करण की प्रतियां बेच रहे थे, जिसे लेकर BNP कार्यकर्ता उन्हें थाने ले आए।

पब्लिशिंग हाउस UPA ने इस घटना पर दुख जताते हुए इसे बेहद शर्मनाक व दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि किताबों की बिक्री में व्यवधान डालना सांस्कृतिक माहौल को खराब करता है। घटना के बाद बांग्लादेश के अन्य प्रकाशकों और पुस्तक विक्रेताओं में भय का माहौल है।

प्रबुद्ध नागरिकों ने 28 सितंबर की इस घटना की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है। उन्होंने मांग की है कि पब्लिशिंग हाउस कर्मियों को डराने वाले आरोपियों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही देश भर में पुस्तक विक्रेताओं और पब्लिशिंग हाउसों को सुरक्षा प्रदान की जाए।

प्रबुद्ध नागरिकों और नागरिक समूह की निष्पक्ष जांच की मांग

अखबार 'प्रोथोम आलो' के अनुसार प्रबुद्ध वर्ग ने कहा कि किताब की सामग्री पर बहस की जा सकती है। किसी भी रचना के विचारों की समीक्षा या आलोचना करने का अधिकार सभी नागरिकों को है।

लेकिन किसी राजनीतिक समूह को किताबों की बिक्री रोकने या शटर बंद कराने का हक नहीं है। किसी किताब पर प्रतिबंध लगाने का फैसला केवल कानून के तहत ही किया जाना चाहिए। प्रबुद्ध वर्ग ने जोर दिया कि मतभेदों को तर्कपूर्ण बहस से जाहिर किया जाना चाहिए। किताबों की दुकानों पर हमले करने और कर्मचारियों को डराने से लोकतंत्र कमजोर होता है।

'द अनफिनिश्ड मेमोयर्स' बांग्लादेश के इतिहास की अहम किताब है, जिसका अलग मूल्यांकन हो सकता है। सरकार को देश में स्वतंत्र पब्लिशिंग माहौल और अभिव्यक्ति की रक्षा करनी चाहिए।

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