अजरबैजान-आर्मेनिया में शांति समझौता, फोटो ( सो. सोशल मीडिया )  
विदेश

ट्रंप बने शांति के हीरो... US की कूटनीति से टूटी दुश्मनी की जंजीर, 35 साल बाद हुई दो दोशों में सुलह

Azerbaijan Armenia peace deal: अजरबैजान और आर्मेनिया ने शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में अमेरिका के मध्यस्थता प्रयासों से प्रेरित एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए।

अमन उपाध्याय

Trump Peace deal:  डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौते कराया। दोनों देशों के नेताओं ने लंबे समय से चल रहे इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके अलावा, उन्होंने अमेरिका के साथ भी एक समझौता किया, जिसमें दक्षिण काकेशस क्षेत्र के महत्वपूर्ण परिवहन मार्गों को पुनः खोलने पर सहमति बनी।

व्हाइट हाउस ने बताया कि इस समझौते के तहत एक प्रमुख परिवहन गलियारा बनाया जाएगा, जिसका नाम "ट्रंप मार्ग फॉर इंटरनेशनल पीस एंड प्रॉस्पेरिटी (TRIPP)" रखा गया है। आपको बता दें कि आर्मेनिया और अजरबैजान के अलावा, ट्रंप अब तक दुनियाभर में 6 और युद्ध समाप्त करने का दावा कर चुके हैं। अगर अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच यह शांति समझौता आगे तक सफल रहता है, तो यह ट्रंप सरकार के लिए एक बड़ी जीत होगी। इसके साथ ही यह समझौता मॉस्को के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है, क्योंकि रूस इस क्षेत्र को अपने प्रभाव में मानता है।

मित्रता लंबे समय तक कायम रहे

व्हाइट हाउस में आयोजित हस्ताक्षर समारोह में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दोनों देश 35 साल से अधिक समय से संघर्ष कर रहे थे, लेकिन अब वे शांति बनाने जा रहे हैं और उनकी यह मित्रता लंबे समय तक कायम रहे। इस मौके पर अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव और आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिनयान भी मौजूद थे।

दोनो देशों में क्या था विवाद?

बता दें कि नागोर्नो-काराबाख क्षेत्र दोनों देशों के बीच विवाद का मुख्य कारण रहा है। यह इलाका भौगोलिक रूप से अज़रबैजान का हिस्सा है, लेकिन यहां ज्यादातर लोग आर्मेनियाई मूल के रहते हैं। 1980 के दशक के अंत में, आर्मेनिया के समर्थन से यह क्षेत्र अज़रबैजान से अलग हो गया था। हालांकि, 2023 में अज़रबैजान ने इस पर फिर से पूरा नियंत्रण हासिल कर लिया, जिसके परिणामस्वरूप वहां रह रहे लगभग 1 लाख जातीय आर्मेनियाई लोगों को आर्मेनिया की ओर पलायन करना पड़ा। उसके बाद से यह क्षेत्र विवादों में आ गया।

इन मुद्दों पर लगी मुहर

ट्रंप ने बताया कि दोनों देशों ने युद्धविराम करने, राजनयिक संपर्क बहाल करने और एक-दूसरे की सीमाओं का सम्मान करने का वचन दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ऊर्जा, व्यापार और AI सहित तकनीकी क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने के लिए प्रत्येक देश के साथ अलग समझौते किए हैं।

शांति समझौते पर हस्ताक्षर

शांति पुरस्कार के योग्य हैं ट्रंप

अज़रबैजान के राष्ट्रपति अलीयेव ने कहा कि ट्रंप नोबेल शांति पुरस्कार के योग्य हैं। उन्होंने बताया कि अजरबैजान और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग पर लगी पाबंदियां भी हटा ली गई हैं। दोनों नेताओं ने ट्रंप की संघर्ष समाप्त कराने में मदद की सराहना की और कहा कि वे उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने की बात की।

इन देशों को हो सकता है खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि यह समझौता दक्षिण काकेशस के भू-राजनीतिक माहौल को पूरी तरह से बदल सकता है। यह क्षेत्र अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण बेहद ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह रूस, यूरोप, तुर्की और ईरान जैसे बड़े क्षेत्रों के बीच स्थित है। इस समझौते के बाद इन देशों के लिए खतरा पैदा हो सकता है।  इसके साथ ही, यहां से अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस पाइपलाइनों का महत्वपूर्ण नेटवर्क गुजरता है। फिर भी, दशकों से यह इलाका बंद सीमाओं, लगातार संघर्षों और जातीय तनावों की समस्या से जूझता आ रहा है।

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