इंग्लैंड ने लौटाई भारत की 500 साल पुरानी मूर्ति (सोर्स- सोशल मीडिया) 
विदेश

इंग्लैंड ने भारत को लौटाई 500 साल पुरानी खास मूर्ति, विधि विधान से देश के इस मंदिर में किया जाएगा स्थापित

India-Britain Relations: ब्रिटेन के ऐश्मोलियन म्यूजियम ने 16वीं सदी की थिरुमंगई आळवार की कांस्य मूर्ति भारत को लौटाई, जो अब तमिलनाडु के थाडिकोम्बु श्री सौंदरराजा पेरुमल मंदिर में पुनः स्थापित होगी।

अक्षय साहू

England Returning Artifacts to India: ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के ऐश्मोलियन म्यूजियम ने 16वीं सदी की एक कांस्य मूर्ति भारत को लौटा दी है। यह मूर्ति तमिलनाडु के थाडिकोम्बु में स्थित श्री सौंदरराजा पेरुमल मंदिर की है और इसे थिरुमंगई आळवार का प्रतिनिधित्व करने वाला माना जाता है। लगभग 500 साल पुरानी यह मूर्ति, जिसे 1967 में म्यूजियम ने सोथबीज से खरीदा था, अब अपने मूल स्थान पर लौटाई जाएगी।

साल 2019 में एक रिसर्चर ने पुष्टि की कि यह मूर्ति थाडिकोम्बु के मंदिर से संबंधित है। इस जानकारी के आधार पर म्यूजियम ने भारतीय उच्चायोग से संपर्क किया और भारत सरकार से मूर्ति तथा मंदिर से जुड़ी सभी जानकारी मांगी। जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि मूर्ति असल में तमिलनाडु की ही है।

भारत को लौटाई गई मूर्ति 

भारत को लौटाई गई मूर्ति के लिए मंगलवार, 4 मार्च को लंदन स्थित इंडिया हाउस में एक औपचारिक समारोह आयोजित किया गया। म्यूजियम के निदेशक डॉ. ज़ा स्टर्गिस (Xa Sturgis  ) ने कहा कि मूर्ति के बारे में जानकारी उन्हें पांच साल पहले मिली थी। पुरानी तस्वीरों के अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ कि मूर्ति मंदिर से चोरी की गई थी और इसे वैध तरीके से म्यूजियम तक नहीं लाया गया। डॉ. स्टर्गिस ने यह भी बताया कि म्यूजियम ने मूर्ति को अच्छी नियत से खरीदा था और आज भी उसी साफ नियत के साथ इसे भारत को लौटा रहा है। मूर्ति की प्रामाणिकता की पुष्टि के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), तमिलनाडु सरकार और मंदिर प्रशासन ने संयुक्त रूप से जांच की। सभी जांचों के बाद यह निर्णय लिया गया कि मूर्ति को भारत लौटाया जाएगा। भारत आने के बाद ASI द्वारा मूर्ति की और जांच की जाएगी और फिर इसे मंदिर में पुनः स्थापित किया जाएगा।

‘सिर्फ कला नहीं जीवित मंदिर की पवित्र मूर्ति’

ऐश्मोलियन म्यूजियम को दुनिया भर की कई अनमोल वस्तुओं के लिए जाना जाता है, जिन पर पहले भी विभिन्न लोगों ने दावा किया, लेकिन आज तक कोई भी वस्तु लौटाई नहीं गई थी। यह पहली बार है जब म्यूजियम ने किसी वस्तु को उसके मूल देश को सौंपा।

हाउस ऑफ लॉर्ड्स की सदस्य बैरोनेस थंगम डेबोननेयर ने कहा कि यह केवल कला का नमूना नहीं है, बल्कि यह एक जीवित मंदिर की पवित्र मूर्ति है। इसी समारोह में चार और भारतीय प्राचीन वस्तुएं भी भारत को लौटाई गईं, जो देश की सांस्कृतिक धरोहर को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगी। 

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