अजीत डोभाल, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

रूस में गरजे अजीत डोभाल, आतंकवाद पर पाकिस्तान को सुनाई खरी-खरी; समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर दिया कड़ा संदेश

Ajit Doval Russia Visit: मॉस्को में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन में अजीत डोभाल ने आतंकवाद के खिलाफ 'दोहरे मापदंड' खत्म करने की अपील करते हुए होर्मुज जैसे मार्गों की सुरक्षा को अनिवार्य बतया।

अमन उपाध्याय

Ajit Doval Russia Visit International Security Forum: भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने रूस की धरती से आतंकवाद और वैश्विक सुरक्षा को लेकर दुनिया को एक कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। मॉस्को में आयोजित 'पहले इंटरनेशनल सिक्योरिटी फोरम' में शिरकत करते हुए डोभाल ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में वैश्विक शक्तियों के 'दोहरे रवैये' पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब समय आ गया है जब दुनिया के देशों को अपना पक्ष चुनना होगा और आतंकवाद के खिलाफ एक ठोस रुख अपनाना होगा।

आतंकवाद पर दोहरा मापदंड बर्दाश्त नहीं

सम्मेलन को संबोधित करते हुए डोभाल ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेनकाब किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में 'दोहरा रवैया' अब नहीं चलेगा। डोभाल ने स्पष्ट किया कि जो देश आतंकियों को पनाह देते हैं, उन्हें यह तय करना होगा कि वे किस तरफ खड़े हैं या तो वे आतंकवाद को पालने वालों का साथ दें, या फिर इसे मिलकर कुचलने में सहयोग करें। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत लगातार वैश्विक मंचों पर सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठा रहा है।

समुद्री मार्गों की सुरक्षा

अजीत डोभाल ने अपने संबोधन में वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा को एक महत्वपूर्ण विषय बताया। उन्होंने विशेष रूप से 'होर्मुज' और 'लाल सागर' का जिक्र करते हुए कहा कि यह मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि पिछले तीन महीनों से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से होर्मुज मार्ग व्यावहारिक रूप से बंद जैसी स्थिति में है। डोभाल ने कहा कि इन मार्गों से व्यापार का निर्बाध संचालन पूरी दुनिया की सप्लाई चेन और तेल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए अनिवार्य है।

पुरानी वैश्विक संस्थाओं में बदलाव की मांग

एनएसए ने अंतरराष्ट्रीय संस्थानों, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र (UN) के पुराने पड़ चुके ढांचे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि 1945 में दूसरे विश्व युद्ध के बाद बनाई गई संस्थाएं आज की आधुनिक समस्याओं और बदलती वैश्विक व्यवस्था की चुनौतियों से निपटने में सक्षम नहीं हैं।

डोभाल ने पुरजोर तरीके से मांग की कि इन संस्थाओं में 'ग्लोबल साउथ' यानी एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों को ज्यादा जगह और प्रभावी आवाज मिलनी चाहिए। उनके अनुसार, जब तक इन संस्थाओं में सुधार नहीं होगा, तब तक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के खतरों का प्रभावी समाधान नहीं निकल पाएगा।

रूस की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक

यह सम्मेलन रूस के सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु की अध्यक्षता में संपन्न हुआ, जिसमें दुनिया भर के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु यह था कि कैसे बदलती हुई बहुध्रुवीय दुनिया में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाए।

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