West Bengal Elections 2026: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने 'बंगाल के लिए 10 प्रतिज्ञा' नाम से एक चुनावी घोषणापत्र जारी किया है। यह घोषणापत्र न केवल लोकलुभावन वादों का पिटारा बताया जा रहा है, बल्कि अगले पांच साल के लिए ममता सरकार के शासन की नींव और रोडमैप भी है।
आइए समझते हैं कि ममता बनर्जी की इस रणनीति के मुख्य पिलर्स क्या हैं और वे कैसे सत्ता विरोधी लहर को मात देने की तैयारी कर रही हैं। कौन हैं वो स्टार प्रचारक जो मैदान में उतरकर ममता दीदी के लिए सीएम की कुर्सी सुरक्षित करने की कोशिश करते दिखेंगे।
ममता बनर्जी की सबसे बड़ी ताकत 'महिला वोटर' मानी जाती है। इसे और मजबूत करने के लिए उन्होंने 'लक्ष्मीर भंडार' योजना को जीवन भर के लिए जारी रखने का वादा किया है। इसके साथ ही अब सामान्य वर्ग की महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपए और SC/ST वर्ग की महिलाओं को 1,700 रुपए की वित्तीय सहायता दी जाएगी। साथ ही बेरोजगार युवाओं को साधने के लिए 'बांग्लार युबा-साथी' योजना के तहत हर महीने 1,500 की आर्थिक मदद देने का वादा किया गया है।
बंगाल के ग्रामीण वोट बैंक को बचाने के लिए टीएमसी ने कृषि और आवास पर बड़ा दांव खेला है। किसान परिवारों और भूमिहीन मजदूरों की मदद के लिए 30,000 करोड़ का अलग कृषि बजट लाने का संकल्प लिया गया है। इसके साथ-साथ राज्य के हर परिवार के पास अपना पक्का घर होने का दावा और हर घर में पीने का पानी सुनिश्चित किया जा रहा है।
स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में ममता बनर्जी जमीनी स्तर पर पहुंचने की कोशिश करती दिखाई दे रही हैं। ममता के वादे में कहा गया है कि हर ब्लॉक और कस्बे में सालाना 'दुआरे चिकित्सा' कैंप लगाए जाएंगे ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की डोरस्टेप डिलीवरी सुनिश्चित हो सके और 'बांग्ला शिक्षायतन' के तहत सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह अपग्रेड करने का वादा किया गया है।
बेहतर गवर्नेंस के लिए 7 नए जिले बनाने और शहरी स्थानीय निकायों की संख्या बढ़ाने का वादा किया गया है और बंगाल को व्यापार का केंद्र बनाने के लिए वर्ल्ड-क्लास लॉजिस्टिक्स, पोर्ट और एक ग्लोबल ट्रेड सेंटर के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।
ममता बनर्जी केवल वादों पर ही निर्भर नहीं हैं, बल्कि वे राजनीतिक मोर्चे पर भी बेहद आक्रामक हैं। ममता ने चुनाव आयोग की ओर से अधिकारियों के तबादले पर सवाल उठाते हुए इसे 'अघोषित राष्ट्रपति शासन' करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल को बहुत पहले से टारगेट किया जा रहा है। उन्होंने सीमा पार से पैसे और हथियार लाए जाने और राज्य में दंगा भड़काने की कोशिश का आरोप भी लगाया है।
पार्टी ने अपनी चुनावी साख को मजबूत करने के लिए 18 स्टार प्रचारकों की सूची जारी की है। इस सूची में खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी कमान संभाल रहे हैं। यह टीम न केवल पश्चिम बंगाल बल्कि असम जैसे पड़ोसी राज्यों में भी पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए दिन-रात एक करने को तैयार है।
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एक्सपर्ट्स की मानें तो ममता बनर्जी ने इन 10 प्रतिज्ञाओं के माध्यम से संदेश देने की कोशिश की है कि विकास का पहिया चौथे कार्यकाल में तेजी से घुमाने की तैयारी है। एक तरफ जहां वे अपनी जन-कल्याणकारी योजनाओं के दम पर लोगों के दिलों में जगह बनाने की कोशिश करती दिख रही हैं वहीं दूसरी तरफ बीजेपी और चुनाव आयोग पर तीखे हमले कर वो बंगाल की अस्मिता और शांति का कार्ड भी खेल रही हैं।