टीएमसी के बागी सांसदों की बैठक की तस्वीर (Imnage- Social Media) 
पश्चिम बंगाल

TMC के बागी सांसदों का बड़ा फैसला, नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी में करेंगे विलय, NDA को समर्थन का ऐलान

West Bengal News: टीएमसी का यह असंतुष्ट धड़ा बहुत जल्द नेशनलिस्‍ट सिटीजन पार्टी में खुद का विलय करने जा रहा है। इस बड़ी सियासी हलचल ने बंगाल के साथ-साथ पूरे पूर्वोत्तर की राजनीति में भूचाल ला दिया।

अर्पित शुक्ला

TMC Political Crisis: पश्चिम बंगाल की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। खबरों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बगावत का झंडा बुलंद करने वाले बागी गुट ने अब एक बड़ा फैसला लिया है। ऐसी खबर है कि टीएमसी का यह असंतुष्ट धड़ा बहुत जल्द नेशनलिस्‍ट सिटीजन पार्टी में खुद का विलय करने जा रहा है। इस बड़ी सियासी हलचल ने बंगाल के साथ-साथ पूरे पूर्वोत्तर की राजनीति में भूचाल ला दिया।

बता दें कि नेशनलिस्‍ट सिटीजन पार्टी की मुख्य रूप से मौजूदगी असम, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्व के राज्यों में है। टीएमसी के बागी गुट इस पार्टी में शामिल होने के साथ-साथ केंद्र की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार को अपना समर्थन भी देने जा रहा है।

किसने बनाई नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी?

बता दें कि नेशनलिस्‍ट सिटीजन पार्टी एक क्षेत्रीय और चुनाव आयोग द्वारा रजिस्‍टर्ड गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है। राष्ट्रीय स्तर पर इस पार्टी का कोई अस्तित्व नहीं है। यही वजह है कि वर्तमान में लोकसभा या राज्यसभा में नेशनलिस्‍ट सिटीजन पार्टी का कोई भी सांसद नहीं है। ये पार्टी चुनावी राजनीति में बहुत सीमित ताकत है। मालूम हो कि इस पार्टी की स्थापना देश के कुछ सीमावर्ती राज्यों में क्षेत्रीय अस्मिता, नागरिकों के स्थानीय अधिकारों और राष्ट्रवाद के मुद्दों को उठाने के लिए किया गया था।

बागी गुट का 22 सांसदों के समर्थन का दावा

इससे पहले बागी गुट की नेता सांसद काकोली घोष ने टीएमसी में बगावत को लेकर बड़ा दावा किया था। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि बागी गुटों में सांसदों की संख्या बढ़कर अब 22 पहुंच गई है। उनके अनुसार, जल्द ही दो और सांसद इस गुट में शामिल होने वाले हैं।

हालांकि, काकोली घोष ने शामिल होने वाले दोनों सांसदों के नाम नहीं बताए। घोष ने यह भी बताया कि लोकसभा स्पीकर ने बागी गुट को समय दिया है। सोमवार को सभी सांसद उनसे मिलेंगे और लोकसभा में अलग संसदीय गुट के रूप में औपचारिक मान्यता देने की मांग करेंगे।

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