Kolkata Airport Mosque Shifting Update: कोलकाता हवाई अड्डे परिसर में स्थित 136 साल पुरानी मस्जिद को स्थानांतरित करने के निर्णय पर राज्य जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने कड़ा विरोध जताया है। पश्चिम बंगाल सरकार में पूर्व मंत्री और राज्य जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष सिद्दीकुल्लाह चौधरी के अनुसार, इस मामले में कोई भी निर्णय अल्पसंख्यक संगठनों के साथ चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।
सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने कहा, हमने उनसे साफ कहा है कि मुसलमान अपने हाथों से मस्जिद न तो तोड़ेंगे और न ही उसे किसी को सौंपेंगे। समाधान के लिए हमने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जमीयत उलेमा-ए-हिंद और दारूल उलूम देवबंद जैसे मान्यता प्राप्त संगठन इस पर राय दें। यदि कोई समाधान निकलेगा तो उन्हीं के माध्यम से निकलेगा। हम यहां रहते हैं और अगर हमसे मस्जिद तोड़ने के लिए कहा जाएगा तो यह स्वीकार नहीं होगा।
कोलकाता हवाई अड्डे के रनवे के पास स्थित मस्जिद को दूसरी जगह ले जाने के मामले पर पूर्व मंत्री सिद्दीकुल्ला चौधरी ने मीडिया से बात कर अपना पक्ष रखा है। उनका कहना है कि समस्या यह है कि 1962 के बाद से अब 63 साल बीत चुके हैं।
आपने सही तरीके से बात नहीं की। 10 साल पहले हमने हवाई अड्डा प्राधिकरण से बात की थी और अब 10 साल बाद वे एक बैठक कर रहे हैं। DM, ADM, हवाई अड्डा प्राधिकरण, CISF सुरक्षा निदेशक, CP ये सब लोग वहां मौजूद थे।
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही मस्जिद को शिफ्ट करने की कोशिशों ने रफ्तार पकड़ ली है। कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे के पास स्थित यह मस्जिद 136 साल पुरानी है। बताया जा रहा है कि यह मस्जिद सुरक्षा मानकों के दायरे में आ रही है। इस वजह से मस्जिद को परिसर से बाहर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। पहले भी समय-समय पर इसको लेकर विवाद सामने आ चुका है।
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बता दें, कोलकाता एयरपोर्ट पर स्थित यह मस्जिद एयरपोर्ट के सेकेंडरी रनवे से केवल 165 मीटर की दूरी पर स्थित है, जबकि अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के नियमों के अनुसार, सक्रिय रनवे के 240 मीटर के दायरे में कोई स्थायी निर्माण नहीं होना चाहिए। मस्जिद की वजह से रनवे के टचडाउन पॉइंट को 88 मीटर पीछे शिफ्ट करना पड़ा है, जिससे बड़े विमानों के संचालन और आधुनिक लैंडिंग सिस्टम लगाने में दिक्कत आती है।