चुनाव आयोग ने टीएमसी का चुनाव चिन्ह फ्रीज किया (सोर्स- सोशल मीडिया)
पश्चिम बंगाल

असली TMC लड़ाई के बीच चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, सिंबल किया फ्रीज, दोनों गुटों से मांगा नया नाम और चिन्ह

TMC Symbol Controversy 2026: TMC के नाम और चुनावी सिंबल 'जोड़ा फूल' को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने ममता और ऋतब्रत गुटों के सामने नए नाम व सिंबल का विकल्प रखा है।

अक्षय साहू

Election Commission Freezes TMC's Symbol: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने आज बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह फ्रीज कर दिया है। इसके बाद अब दोनों गुट आगामी उपचुनाव में पार्टी का नाम और सिंबल का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। चुनाव आयोग ने कल ममता और ऋतब्रत गुट से नया नाम और चुनाव चिन्ह मांगा है।

चुनाव आयोग की ओर से जारी आदेश के मुताबित, दोनों में से किसी भी गुट को ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के लिए आरक्षित 'फूल और घास'  वाले चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने की भी इजाजत नहीं होगी।  दोनों गुट अपने-अपने गुट के लिए जो भी नाम चाहें, उसका इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसमें वे चाहें तो अपनी मूल पार्टी 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' का ज़िक्र भी कर सकते हैं। दोनों गुटों को अलग-अलग चुनाव चिह्न दिए जाएंगे, जिन्हें वे मौजूदा उपचुनावों के लिए चुनाव आयोग द्वारा जारी 'फ्री सिंबल' की सूची में से चुन सकते हैं।

दोनों गुटों से मांगा नया नाम और चिन्ह

चुनाव आयोग ने टीएमसी के दोनों गुटों को 18 सितंबर तक नया नाम और चुनाव चिन्ह मांगा है। आयोग ने दोनों पक्षों से तीन-तीन विकल्प देने के लिए कहा है। नोटिस में आयोग ने स्पष्ट किया कि दोनों गुट 18 सितंबर को सुबह 11 बजे तक यह बताएं कि वे किस नाम और चुनाव चिन्ह के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं।

अगले महीने पश्चिम बंगाल में होंगे उपचुनाव

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव के लिए बुधवार को तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों के उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए। दोनों पक्षों के उम्मीदवारों ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और 'जोड़ा फूल' चुनाव चिन्ह के साथ अपना पर्चा भरा था। इसे लेकर विवाद खड़ा हो गया था। 

विवाद को लेकर आयोग ने की थी सुनवाई 

विवाद बढ़ता देख चुनाव आयोग ने गुरुवार (17 सितंबर) को टीएमसी के नियंत्रण को लेकर ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुटों की अलग-अलग सुनवाई की। इस दौरान ममता गुट ने किसी भी अंतरिम आदेश का विरोध किया, जबकि ऋतब्रत गुट ने पश्चिम बंगाल में छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले चुनाव चिन्ह को लेकर जल्द फैसला करने की मांग रखी थी।

बागी गुट की ओर से पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी, चंद्रिमा भट्टाचार्य, अकरुल जमान, अरूप रॉय और एक वकील ने चुनाव आयोग के सभी सदस्यों से मुलाकात की और अपना पक्ष रखा। सुनवाई के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, हमने अपना पक्ष रखा और हमसे पूछे गए सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि चुनाव चिन्ह का मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि नंदीग्राम और रेजीनगर में उपचुनाव होने हैं और दोनों गुटों की ओर से उम्मीदवार पहले ही नामांकन दाखिल कर चुके हैं।

ममता गुट ने अंतरिम आदेश का किया विरोध

इसके बाद ममता बनर्जी गुट के सदस्यों डेरेक ओब्रायन, कल्याण बनर्जी, महुआ मोइत्रा और सागरिका घोष ने चुनाव आयोग के सदस्यों से मुलाकात की। ममता गुट ने किसी भी तरह के अंतरिम आदेश का विरोध किया। उसका कहना है कि इस तरह के निर्देश जारी करने का कोई आधार नहीं है। कल्याण बनर्जी ने कहा, हमने कहा कि कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया जाना चाहिए। कोई भी आदेश जारी नहीं किया जाना चाहिए। 

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