Dilip Ghosh on Minority: पश्चिम बंगाल में BJP पहली बार अपनी सरकार बनाने जा रही है। भाजपा ने राज्य में 207 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया है। BJP के जीते हुए विधायकों में कोई भी अल्पसंख्यक समुदाय से नहीं है। भाजपा के सीनियर नेता दिलीप घोष से जब इसको लेकर सवाल किया गया कि बंगाल में बीजेपी की नई सरकार में अल्पसंख्यक मामलों से जुड़ा मंत्रालय किसे मिलेगा? इस पर उन्होंने जवाब नहीं दिया, लेकिन अल्पसंख्यकों को ‘क्रिमिनल’ करार दे दिया है।
मीडिया से बात करते हुए दिलीप घोष ने कहा कि अल्पसंख्यकों का विकास हुआ है और उनका अलग से विकास नहीं होगा। उन्होंने आगे कहा, "हम तो सबका साथ सबका विकास करते हैं और बीते 80 सालों से अल्पसंख्यकों का ही विकास हुआ है। फिर भी वो गरीब हैं, वो अशिक्षित हैं, क्रिमिनल हैं, क्यों?”
भाजपा नेता ने कहा कि अब उन लोगों को खुदसे सवाल पूछना चाहिए और उन पार्टियों से पूछना चाहिए। भाजपा की कोई जिम्मेदारी नहीं है अल्पसंख्यकों का विकास करने की। वो लोग हमें वोट भी नहीं देते। हां घर और सुविधाएं मिलेंगी। प्रधानमंत्री मोदी ने पहले भी दिया है अब भी देंगे। बता दें कि इससे पहले दिलीप घोष ने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका हिसाब’ वाला नारा दिया था। एक इंटरव्यू में उन्होंने कई मामलों पर बात की और नई सरकार के एजेंडे पर बात करते हुए घोष ने कहा कि "सबका साथ, सबका विकास का रास्ता अपनाया जाएगा. लेकिन नई बात होगी सबका हिसाब,जिसमें कानून अपना काम करेगा।
भाजपा के जीते हुए विधायकों में कोई भी अल्पसंख्यक समुदाय का चेहरा नहीं है। ऐसी स्थिति में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय (Minority Affairs) के लिए सरकार के पास तीन विकल्प हैं।पहला मुख्यमंत्री अपनी पसंद के किसी भी हिंदू नेता को इस विभाग का मंत्री बना सकते हैं। इससे पहले भी कई राज्यों और केंद्र सरकार में भी गैर-अल्पसंख्यक नेताओं को ये जिम्मेदारी दी गई है। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश में वर्तमान में ओम प्रकाश राजभर (सुभासपा प्रमुख) अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हैं।
वहीं, BJP ने अपने प्रस्ताव में पश्चिम बंगाल में 'विधान परिषद' के गठन का वादा किया है। अगर ये परिषद बनती है, तो फिर पार्टी किसी मुस्लिम चेहरे को मनोनीत कर उसको मंत्री बना सकती है।