नवभारत डेस्क: बच्चों की पढ़ाई अब सस्ती नहीं रह गई है। अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए आपको शायद अब और भी ज्यादा मेहनत करने होंगे। अगर आप ऐसा नहीं करते तो शायद आपके बच्चे कॉम्पिटिशन की दुनिया में कहीं पीछे छुट जाएंगे। वैसे तो सरकार द्वारा हमेशा मुफ्त शिक्षा के अधिकार का दावा किया जाता रहा है, लेकिन वो शिक्षा आपको कहां तक ले जाएगी उसका कोई दावा नहीं होता।
पढ़ाई अब सस्ती नहीं रही इसका दावा सोशल मीडिया पर किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रहा है जिसमें हैदराबाद में LKG के बच्चों की फीस 3.7 लाख रुपए बताई जा रही है। जिसके बाद इस विषय को लेकर चर्चा और भी ज्यादा तेज हो गई है।
सोशल मीडिया पर अविरल भटनागर के आईडी से एक पोस्ट शेयर की गई। जिसमें लिखा, 'हैदराबाद में एलकेजी की फीस 2.3 लाख से बढ़कर 3.7 लाख हो गई है, जो राष्ट्रीय स्तर पर भी समान है।' उन्होंने बताया कि मुद्रास्फीति को समायोजित करने पर, पिछले 30 वर्षों में स्कूल की फीस 9 गुना और कॉलेज की फीस 20 गुना बढ़ गई है। जिसके बाद उनका ये दावा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस पोस्ट पर एक यूजर ने प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, भोजन, स्वास्थ्य और शिक्षा - इनमें से प्रत्येक व्यय किसी भी औसत मध्यम वर्गीय परिवार के 70% से अधिक का योगदान देता है। इन तीनों मुद्रास्फीति के लिए मुद्रास्फीति आसानी से सालाना 10-20% है। लेकिन सरकारी मुद्रास्फीति आपको अभी भी बताएगी कि सीपीआई मुद्रास्फीति 3-4% है। अपनी वित्तीय स्वतंत्रता यात्रा के लिए आप किस मुद्रास्फीति पर विचार करना चाहते हैं, इसके बारे में बहुत सचेत रहें।'
वहीं दूसरे यूजर ने लिखा, 'लोग चाहते हैं कि स्कूल पांच सितारा होटलों की तरह हों। शानदार रिसेप्शन, ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल, राष्ट्रीय स्तर के खेल परिसर, कॉर्पोरेट स्तर के आईटी लैब और बुनियादी ढांचे के मामले में बहुत कुछ। फीस बढ़ रही है क्योंकि इन अपेक्षाओं को पूरा करना बहुत महंगा हो गया है। मेरे एक दोस्त का परिवार एक स्कूल चलाता है, और हालाँकि वहाँ की फीस भी अधिक है, फिर भी वे इसे लाभदायक बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। आजकल, माता-पिता स्कूल के बजाय बस पाँच सितारा होटल के अनुभव की तलाश कर रहे हैं। स्कूल की फीस 9 गुना बढ़ गई है और स्कूल प्रबंधन के खर्च 15 गुना बढ़ गए हैं।