रौलाने फेस्टिवल 
वायरल

क्या है Raulane Festival : पारंपरिक पोशाक और चेहरे पर चांदी और सोने के गहने, तस्वीरें हुईं वायरल

Raulane Festival Viral Photos हिमाचल प्रदेश के किन्नौर घाटी में मनाया जाने वाला पारंपरिक रौलाने फेस्टिवलl सोशल मीडिया पर तस्वीरें हो रहीं वायरल।

हितेश तिवारी

Raulane Festival : हिमाचल प्रदेश के किन्नौर घाटी में मनाए जाने वाला पारंपरिक रौलाने फेस्टिवल इस बार सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा विषय बन हुआ है। चेहरे पर चांदी और सोने के गहने, सिर पर रंग-बिरंगे स्टायरोफोम फूल और शरीर पर हाथ से बुने पारंपरिक शॉल—स्थानीय लोग दुल्हन-दूल्हे की तरह सजकर इस त्योहार में शामिल होते हैं।

यह उत्सव सर्दी के अंत और फसल के स्वागत का प्रतीक माना जाता है। कुछ दिनों तक गांव के लोग एक साथ नाचते, गाते और खुलकर जश्न मनाते हैं। लंबे समय तक यह उत्सव सोशल मीडिया से दूर रहा, लेकिन हाल ही में ट्रैवल ब्लॉगर्स की पोस्ट वायरल होने के बाद यह अचानक लोगों की नजर में आ गया।

कई AI चैटबॉट्स ने इन तस्वीरों को बिना श्रेय दिए वॉलपेपर और गेम बैकग्राउंड में बदल दिया, जिसके बाद इस त्योहार की मौलिक तस्वीरों को लेकर चर्चा तेज हो गई।

होली के अगले दिन मनाया जाता है रौलाने फेस्टिवल

ट्रैवल फोटोग्राफर कनवर पाल सिंह के मुताबिक, यह उत्सव आमतौर पर होली के अगले दिन मार्च में शुरू होता है और करीब पांच दिन चलता है। किन्नौर के अलावा संगला और कल्पा के आसपास के गांवों के लोग भी इसमें शामिल होते हैं। सिंह के अनुसार, इस त्योहार में पुरुष दूल्हे की तरह और महिलाएं दुल्हन की तरह सजती हैं तथा अपने पारंपरिक और विरासत में मिले गहने पहनती हैं।

उन्होंने बताया कि इसका कोई विशेष धार्मिक महत्व नहीं है, बल्कि यह एक पारंपरिक जनजातीय उत्सव है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, सर्दियों के खत्म होते ही पहाड़ी परियों को विदा करने की रस्म इस दौरान निभाई जाती है। यह पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है।

त्योहार के लिए दो दिन पहले से सजते हैं लोग

कनवर पाल सिंह ने यह भी बताया कि पहले दिन दो-तीन जोड़े सजधज कर आते हैं, अगले दिन पांच जोड़े और उसके बाद आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हो जाते हैं। सब लोग एक साथ नाचते हैं और पूजा करते हैं। वह कहते हैं कि यह उनका इस उत्सव को कवर करने का पहला अनुभव था और यह बेहद खास रहा क्योंकि भीड़ कम थी।

सोशल मीडिया पर अचानक वायरल होने के बाद यह Raulane Festival का पहला बड़ा ‘PR’ बन गया है। स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि परंपराओं को सम्मान देते हुए लोग इस त्योहार को समझें, और इसकी सांस्कृतिक विरासत को सही रूप में दुनिया के सामने लाया जाए।

(स्टोरी सोर्स - इंडियन एक्सप्रेस)

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