Japan Traveler India Travel Video : भारत की संस्कृति, इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता दुनियाभर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। इसी का एक ताजा उदाहरण जापान की ट्रैवलर हन्ना जपन्ना हैं, जिन्होंने भारत में तीन महीने तक सोलो बैकपैकिंग करने के बाद अपने पांच सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थलों की सूची साझा की है।
इंस्टाग्राम पर @hanna_japanna नाम के अकाउंट से पोस्ट किए गए वीडियो में उन्होंने बताया कि भारत की यात्रा उनके लिए बेहद यादगार रही। उनकी सूची में पांचवें स्थान पर महाराष्ट्र की एलोरा गुफाएं, चौथे पर कर्नाटक का हम्पी, तीसरे पर मेघालय, दूसरे पर हिमाचल प्रदेश का धर्मशाला और पहले स्थान पर वाराणसी रहा। उन्होंने कहा कि एलोरा की प्राचीन शिल्पकला, हम्पी का जादुई माहौल और मेघालय की प्राकृतिक सुंदरता ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया।
हन्ना ने बताया कि धर्मशाला में बिताए गए 10 दिनों ने उनकी सोच बदल दी। यहां उन्होंने ध्यान (मेडिटेशन) का कोर्स किया और त्रिउंड ट्रेक भी पूरा किया। उनके अनुसार, इस अनुभव ने उन्हें सिर्फ ध्यान करना ही नहीं, बल्कि करुणा और धैर्य का महत्व भी सिखाया।
वहीं मेघालय को उन्होंने भारत के सबसे अलग और शांत राज्यों में से एक बताया। शिलांग की कैफे संस्कृति, चेरापूंजी के झरने और कोंगथोंग गांव के सांस्कृतिक अनुभव को उन्होंने अपनी यात्रा के सबसे खास पलों में शामिल किया। हम्पी के विशाल पत्थरों, प्राचीन मंदिरों और सुबह-सुबह सुनाई देने वाली पूजा की आवाजों ने भी उन्हें बेहद प्रभावित किया।
ये खबर भी पढ़ें : 6 किलोमीटर तक पीठ पर बच्ची को उठाकर चलीं वार्डन, इंसानियत की मिसाल बना आंध्र प्रदेश का भावुक वीडियो
हालांकि, उनकी पूरी यात्रा में वाराणसी सबसे खास बनकर उभरा। उन्होंने कहा कि इस शहर को शब्दों में बयां करना आसान नहीं है। यहां का स्ट्रीट फूड, लस्सी, घाटों का माहौल, लोगों की ऊर्जा और आध्यात्मिक वातावरण उन्हें इतना पसंद आया कि उन्होंने अपनी यात्रा की योजना ही बदल दी और दोबारा वाराणसी लौट आईं।
हन्ना ने माना कि वाराणसी हर किसी के लिए नहीं हो सकता, लेकिन उनके लिए यह भारत का सबसे यादगार शहर बन गया। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
कई यूजर्स ने उनकी पसंद की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने भारत की असली सांस्कृतिक और ऐतिहासिक खूबसूरती को समझा है, जबकि कुछ लोगों ने खुशी जताई कि उन्होंने गोवा और राजस्थान जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों के बजाय देश के अलग-अलग हिस्सों को महत्व दिया।