NRI Life Japan : जापान में रहने वाली एक भारतीय महिला का देर रात अकेले घूमने का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। इंस्टाग्राम यूजर शीतल ने करीब रात 11 बजे जापान की एक शांत सड़क पर टहलते हुए अपना वीडियो शेयर किया। वीडियो में उन्होंने बताया कि सड़क पर ज्यादा लोग नहीं थे, इसके बावजूद उन्हें बिल्कुल डर या असुरक्षा महसूस नहीं हो रही थी।
शीतल ने कहा कि जापान में रहने के दौरान उन्होंने कभी ऐसा महसूस नहीं किया कि बाहर निकलने के लिए समय देखकर सोचना पड़े। उनके मुताबिक सुबह 11 बजे हो या रात 11 बजे, वह आमतौर पर खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं। उन्होंने कैमरा सड़क की तरफ करते हुए वहां का माहौल भी दिखाया और बताया कि अकेले होने के बावजूद उन्हें किसी तरह की चिंता नहीं थी।
शीतल ने कहा कि एक भारतीय महिला के तौर पर उनके लिए यह एहसास काफी मायने रखता है। उन्होंने माना कि जापान भी पूरी तरह समस्याओं से मुक्त देश नहीं है और वहां भी कई तरह की चुनौतियां हैं, लेकिन महिलाओं को मिलने वाली सुरक्षा और रात में बाहर निकलने की आजादी उन्हें खास तौर पर अच्छी लगती है।
वीडियो के आखिर में उन्होंने उम्मीद जताई कि एक दिन भारत में भी महिलाएं बिना समय की चिंता किए इसी तरह आजादी से बाहर निकल सकेंगी। उनका कहना था कि महिलाओं को सिर्फ इस वजह से अपनी योजनाएं नहीं बदलनी चाहिए कि अब रात हो गई है। शीतल की इस बात ने सोशल मीडिया पर महिलाओं की सुरक्षा, आजादी और रात में सार्वजनिक जगहों के इस्तेमाल को लेकर चर्चा शुरू कर दी।
वीडियो पर कई यूजर्स ने अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने रात में बिना डर के बाहर निकल पाने की क्षमता को ‘आजादी की लग्जरी’ बताया। वहीं, कुछ लोगों ने इस चर्चा में एक अलग पहलू भी सामने रखा। एक कमेंट में कहा गया कि जापान में अपराध की दर अपेक्षाकृत कम जरूर है, लेकिन वहां अपराध पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं और महिलाओं के खिलाफ अपराध भी होते हैं, इसलिए रात में सामान्य सावधानी बरतना जरूरी है।
कुछ भारतीय यूजर्स ने यह भी बताया कि भारत में भी ऐसे कई इलाके हैं जहां महिलाएं देर रात तक सुरक्षित महसूस कर सकती हैं। एक यूजर ने मुंबई के वाशी इलाके का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लोग आधी रात तक घूमने और बाहर खाना खाने जाते हैं। इस तरह शीतल का वीडियो सिर्फ जापान की सुरक्षा की चर्चा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने भारत में महिलाओं की रात के समय सुरक्षा और उन्हें मिलने वाली स्वतंत्रता पर भी बहस छेड़ दी।