65 वर्षीय किसान ने बैल की जगह खुद ही जोता हल (सौजन्यः सोशल मीडिया) 
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65 वर्षीय किसान ने बैल की जगह खुद ही जोता हल, लातूर का वीडियो वायरल

अंबादास गोविंद पवार महाराष्ट्र के लातूर जिले के हाडोल्टी गांव के किसान हैं। उनकी उम्र 65 साल है। खेती का खर्च वहन न कर पाने की वजह से उन्होंने खुद बैलों का काम यानी हल जोतना शुरू कर दिया है।

आंचल लोखंडे

लातुर: सरकार किसानों के अच्छे दिनों की बात कर रही है। कृषि प्रधान देश को आधुनिक कृषि से जोड़ने के लिए सरकार कई योजनाओं का ऐलान भी कर रही है। लेकिन इस समय महाराष्ट्र में किसानों की तस्वीर कुछ अलग है। 65 वर्षीय एक किसान ने इसलिए आत्महत्या कर ली क्योंकि वह खेती की लागत नहीं उठा पा रहा था। अब कृषि प्रधान देश की एक और तस्वीर जो सामने आई है वह काफी गंभीर है। घटना लातूर जिले के हाडोल्टी गांव की है।

दरअसल अंबादास गोविंद पवार महाराष्ट्र के लातूर जिले के हाडोल्टी गांव के किसान हैं। उनके पास ढाई एकड़ सूखी जमीन है। उनकी उम्र 65 साल है। खेती का खर्च वहन न कर पाने की वजह से उन्होंने खुद बैलों का काम यानी हल जोतना शुरू कर दिया है। पिछले सात-आठ सालों से वह इसी तरह काम कर रहे हैं। इस साल उनका शरीर थक गया है। उनके हाथ-पैर और गर्दन कांप रहे हैं, लेकिन मेहनत का सिलसिला खत्म नहीं हो रहा है।

खेती का खर्च वहन करने में असमर्थ

खेती का खर्च वहन करने में असमर्थ होने के कारण उन्होंने बैलों की जगह खेती में खुद हल जोता है। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। चूंकि वह बुवाई से पहले की खेती, बीज बोने और खाद का खर्च वहन नहीं कर सकते, इसलिए वह और उनकी पत्नी खुद ही खेतों में काम करते हैं। उनके पास ट्रैक्टर, बैल और हल के लिए पैसे नहीं हैं। चूंकि उनके पास खुद ही काम करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, इसलिए 65 वर्षीय पति औता और 60 वर्षीय पत्नी मिलकर काम कर रहे हैं।

बैलों से हल चलाने के लिए प्रतिदिन 2.5 हजार रुपये

अंबादास गोविंद पवार की एक बेटी है जिसकी शादी हो चुकी है। बेटा पुणे में छोटे-मोटे काम करता है। उनकी बहू और दो पोते गांव में रहते हैं। पोते-पोतियों की पढ़ाई और आजीविका चलाने के लिए वे खुद काम कर रहे हैं। उन्हें हल चलाने के लिए बैलों के लिए 2500 रुपये प्रतिदिन देने पड़ते हैं और ट्रैक्टर के लिए और पैसे देने पड़ते हैं, इसलिए वे खुद बैलों के साथ जुड़ जाते हैं।

प्रकृति और सरकारी नीतियों की मार से किसान परेशान

यह तस्वीर निश्चित रूप से आधुनिक महाराष्ट्र के लिए निराशा जनक है। कृषि उत्पादों के लिए मूल्य की कमी,बीज और उर्वरकों की बढ़ती कीमतें,बढ़ती श्रम लागत इन सबके संयोजन ने किसानों को संघर्ष में डाल दिया है। प्रकृति की अनिश्चितता और एक पंगु कृषि नीति ने आम किसानों की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। इस वीडियो के वायरल होने पर सरकार की भी आलोचना हो रही है। तो वहीं किसान के प्रती कई लोग संवेदनाए जता रहे है साथ ही किसान की हिम्मत लगन को सलाम भी कर रहे है।

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