Harish Rawat Resigns From Congress: उत्तराखंड की राजनीति से बड़ी खबर सामने आई है। शुक्रवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने पार्टी के दो महत्वपूर्ण पदों से इस्तीफा देने की ऐलान किया।
यह फैसला उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद लिया, जब उनके पूर्व पीए और करीबी सहयोगी से जुड़े मामले को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई। हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उनके किसी काम से जुड़े विवाद से कांग्रेस पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचता है तो वह ऐसी स्थिति नहीं चाहते। इसलिए उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया है।
कांग्रेस नेता हरीश रावत ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा, मीडिया में ऐसी खबरें आ रही हैं कि मेरे PA के पास से भारी मात्रा में कैश, गहने और दूसरी कीमती चीजें जब्त या बरामद की गई हैं। मामले की सच्चाई समय के साथ साफ हो जाएगी। जीना मेरे OSD रह चुके हैं और उन्होंने पार्टी और सरकार में अलग-अलग पदों पर रहते हुए अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। वह बहुत अच्छे, विनम्र और मेहनती इंसान हैं।
हरिश रावत ने कहा अगर उन्होंने ग्राम सेवकों की भर्ती के दौरान OMR शीट के साथ छेड़छाड़ की है, और अगर इस बात का सबूत है कि उन्होंने ऐसा कोई गलत काम किया है, तो मुझे ऐसी कथित हिम्मत वाली हरकत पर शर्म आती है। हालांकि, मुझे इस आरोप पर बिल्कुल भी यकीन नहीं है। जब भी कोई मुझसे पूछता था कि चुनाव कब होंगे, तो मैं मज़ाक में कहता था कि चुनाव तब होंगे जब CBI मेरे दरवाज़े पर दस्तक देगी।
उन्होंने आगे लिखा कि अगर अभी तक ऐसा नहीं हुआ है, तो इसका मतलब है कि चुनाव अगले साल मार्च-अप्रैल में होंगे। हालांकि, इस बार मेरे दरवाजे पर दस्तक देने के बजाय, मेरे एक सहयोगी के दरवाजे पर दस्तक देने और एक नैरेटिव बनाने की कोशिश की गई है।
राहुल गांधी भी 'स्टूडेंट्स की गूंज' प्रोग्राम के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। अपने इष्ट देवता को याद करने के बाद, मैंने एक बड़ा फैसला लिया है। मैं किसी सरकारी पद पर नहीं हूं, इसलिए इस्तीफा देने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
पार्टी की छवि को लेकर हरीश रावत ने लिखा, हालांकि, मैं उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी का सदस्य हूं और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस वर्किंग कमेटी का स्थायी आमंत्रित सदस्य हूं। मैं सम्मानपूर्वक इन दोनों पदों से हटना चाहता हूं, क्योंकि मैं नहीं चाहता कि मेरी वजह से पार्टी का संघर्ष किसी भी तरह कमजोर हो।
अधीनस्थ सेवा चयन आयोग इसे राज्य के युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए बनाया था। हमने लोक सेवा आयोग को समय पर परीक्षा कराने के लिए मजबूर किया। असल में, हमारे छोटे से कार्यकाल के दौरान, ऊंचे पदों के लिए दो बार भर्तियां हुईं। हमने भर्ती बोर्ड बनाए, एक मेडिकल भर्ती बोर्ड और एक शिक्षा भर्ती बोर्ड।
अगर उस प्रक्रिया के दौरान नियुक्तियों में हमसे कोई गलती हुई है, तो मैं इसके लिए उत्तराखंड की जनता से माफी मांगता हूं। लेकिन मैं विनम्रतापूर्वक अपनी बात दोहराना चाहता हूं कि हमारे 3 साल के कार्यकाल में सरकारी पदों के लिए 42,000 से ज्यादा भर्तियां की गईं।
नियुक्तियों और परीक्षाओं में गड़बड़ी हमारी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। अगर जाने-अनजाने में मुझसे ऐसा कोई काम हुआ है जिससे हमारे राज्य के युवाओं के भविष्य पर बुरा असर पड़ा है, तो मैं खुद को इसके लिए सजा का हकदार मानता हूं और इस चूक के लिए राज्य की जनता से माफी मांगता हूं।
हरीश रावत ने आगे लिखा मैं यह सार्वजनिक अपील भी करना चाहता हूं कि अगर किसी के पास ऐसी नियुक्तियों के मामलों में मेरे दखल का कोई सबूत है, तो उन्हें वे सबूत जरूर CBI, ED या राज्य पुलिस को देने चाहिए। क्योंकि जिस भी व्यक्ति को बड़ी ज़िम्मेदारियां संभालने का मौका मिलता है, उसे हमेशा ऐसे घिनौने लालच से बचना चाहिए। और अगर मुझसे ऐसी कोई चूक हुई है, तो मैं फिर दोहराता हूं कि मैं खुद को सज़ा का हकदार मानता हूं और कानून को मुझे सजा देनी चाहिए।