वाराणसी मस्जिद पर आसिफ अली जरदारी का पोस्ट (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
वाराणसी

काशी में रेलवे के नोटिस पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति को क्यों लगी मिर्ची? भारत टूटने की धमकी पर मिला करारा जवाब

Kashi Railway Station Redevelopment: काशी रेलवे स्टेशन के रीडेवलपमेंट और मस्जिद गिराने के नोटिस को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के ट्वीट पर बवाल खड़ा हो गया है।

प्रिया जैस

Pakistan President Asif Ali Zardari Tweet For Kashi: वाराणसी में काशी रेलवे स्टेशन रिडेवलेपमेंट प्रोजेक्ट के तहत वहां मौजूद मकानों मस्जिदों और मंदिरों को हटाया जा रहा है। इस बीच एक नया मामला सामने आ गया है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स से एक दिन पहले पूर्व बनारस के बारे में एक पोस्ट जारी किया गया, जिसके बाद मस्जिद का मुद्दा उठ गया।

आसिफ अली जरदारी के एक्स हैंडल पोस्ट में बनारस में मस्जिद के खिलाफ रेलवे की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई गई। काशी में रेलवे प्रशासन और मस्जिद के बीच चल रहे विवाद में पाकिस्तान के राष्ट्रपति कूद पड़े हैं, जिससे विवाद गहरा गया है। बता दें, कि रेलवे प्रशासन एक मस्जिद को पहले ही गिरा चुका है और अब एक और मस्जिद हटाने के लिए नोटिस जारी किया गया है।

रेलवे ने मस्जिद को भेजा नोटिस

रेलवे के नोटिस में कहा गया है कि काशी स्टेशन आपको सूचित करता है कि काशी रेलवे स्टेशन के पहले एंट्री गेट की ओर (सर्कुलेटिंग एरिया के पास) रेलवे भूमि पर अवैध रूप से मस्जिद बनाई गई हैं जो कि, काशी रेलवे स्टेशन पर चल रहे रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट में बाधा बन रही है।

इस संबंध में मूलवाद संख्या-1174/1991 अन्जुमन इन्तेजामिया बनाम यूनियन ऑफ इंडिया माननीय न्यायालय सिविल जज (जू.डी.) शहर वाराणसी के न्यायालय में चल रहा था। इस केस को न्यायालय ने 24 अगस्त 2024 को खारिज कर दिया था। रेलवे प्रशासन ने रेलवे भूमि पर अवैध रूप से बने हुए मस्जिद को हटाने का निर्णय लिया गया है।

वाराणसी मस्जिद (सौजन्य-सोशल मीडिया)

अतः आप से अनुरोध है कि 20 जून 2026 तक अवश्य हटा लें अन्यथा रेलवे प्रशासन द्वारा उक्त तिथि के बाद किसी भी दिन मस्जिद हटाने और ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की जायेगी। नोटि‍स के जारी होने के बाद अब मोहलत पूरी होते ही कभी भी मस्जिद को गिराया जा सकता है। इसके मामले में मस्‍ज‍िद की ओर से भी जवाब दाख‍िल क‍िया गया है।

मस्जिद की ओर से दाखिल जवाब

जवाब में कहा गया है कि रेलवे प्रशासन की ओर से जारी कथित नोटिस पर न तो किसी अधिकारी के हस्ताक्षर हैं और न ही जारी करने की तारीख। नोटिस में जिस मुकदमे (उसे हटाने के मामले) का जिक्र है, वह मस्जिद के पूर्व में स्थित जमीन से जुड़ा था। मस्जिद का उस मुकदमे से कोई लेना-देना नहीं था और न ही अब है। यह नोटिस गुमराह करने वाला है।

आगे यह भी कहा गया है कि उसी मुकदमे में, रेलवे प्रशासन ने अपने हलफनामे के जरिए मस्जिद के अस्तित्व और उस पर मुस्लिम समुदाय के मालिकाना हक को स्वीकार किया था। मस्जिद 1034 में बनाई गई थी और यह 1883-84 के सेटलमेंट मैप्स के साथ-साथ उससे पहले के मैप्स में भी दिखाई देती है।

रेलवे 1887 में राजघाट पहुंचा। इससे साबित होता है कि मस्जिद रेलवे के आने से पहले से मौजूद थी। अंजुमन मसाजिद रेलवे प्रशासन के दुर्भावनापूर्ण दावे का विरोध कर रही है कि मस्जिद अवैध है और हर कानूनी स्तर पर इसके लिए लड़ती रहेगी। रेलवे प्रशासन का नोटिस भ्रामक है और शहर में कानून-व्यवस्था को बाधित करने का प्रयास दर्शाता है।

पाकिस्तान राष्‍ट्रपत‍ि का पोस्ट

राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भारत में ऐतिहासिक मुस्लिम धार्मिक स्थलों जिनमें वाराणसी की 1,000 साल पुरानी मस्जिद गंज शहीदा भी शामिल है, उसे गिराए जाने और उन्हें दी जा रही धमकियों पर गहरी चिंता जताई।

राष्ट्रपति ने भारत से ऐसी कार्रवाइयां तुरंत रोकने को कहा और चेतावनी दी कि इससे भारत के टूटने और वहां हमेशा के लिए अराजकता फैलने का खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने ऐसी कार्रवाइयों को तुरंत रोकने और अल्पसंख्यकों के अधिकारों व साझा सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा करने की अपील की।

बनारस के इस मुद्दे पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति के पोस्ट करने पर पुल‍िस प्रशासन और मुस्‍ल‍िम धर्म गुरुओं की ओर से आपत्ति जताई गई है। उनका कहना है कि यह मामला रेलवे और मस्‍ज‍िद प्रशासन के बीच का है। इसमें पाकिस्‍तान के राष्‍ट्रपत‍ि की ओर से आपत्‍त‍िजनक पोस्‍ट करना द्वेष पूर्ण है।

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