अजीत प्रसाद की उम्मीदवारी घोषित करते हुए सपा मुखिया अखिलेश यादव व सांसद अवधेश प्रसाद (सोर्स-सोशल मीडिया) 
उत्तर प्रदेश

यूपी उपचुनाव: मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर रोचक होगी जंग; 'परिवारवाद' करेगा सपा को तंग, सुलह देगी 'आनंद'

उत्तर प्रदेश में 10 सीटों पर होने वाले विधासभा चुनावों के लिए राजनीतिक दलों की कवायदें शुरू हो गई हैं। इस बीच सपा ने मिल्कीपुर सीट से उम्मीदवार तय कर दिया है। उम्मीदवार तय होने के साथ ही यूपी के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। क्योंकि एक तरफ बीजेपी ने इस सीट प्रतिष्ठा का सवाल बना रखा है तो दूसरी तरफ सपा प्रतिष्ठा पर चोट करने की फिराक में है।

अभिषेक सिंह

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 10 सीटों पर होने वाले विधासभा चुनावों के लिए राजनीतिक दलों की कवायदें शुरू हो गई हैं। इस बीच सपा ने मिल्कीपुर सीट से उम्मीदवार तय कर दिया है। उम्मीदवार तय होने के साथ ही यूपी के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। क्योंकि एक तरफ बीजेपी ने इस सीट प्रतिष्ठा का सवाल बना रखा है तो दूसरी तरफ सपा प्रतिष्ठा पर चोट करने की फिराक में है।

लोकसभा चुनाव 2024 में मिल्कीपुर विधायक अवधेश प्रसाद के सांसद बन जाने के बाद रिक्त हुई थी। जिसके बाद यहां बाकी अन्य 9 सीटो के साथ उपचुनाव होने हैं। जिसके लिए बीजेपी और सपा दोनों जद्दोजेहद में जुटी हुई है। सपा यहां अपना दबदबा बरकरार रखने की कोशिश में है तो वहीं बीजेपी लोकसभा चुनाव में फैजाबाद सीट पर मिली हार का हिसाब चुकता करने का ख़्वाब संजो रही है।

सपा ने घोषित किया प्रत्याशी

अब यहां सपा ने तेजी दिखाते हुए उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। सपा ने अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद को यहां से प्रत्याशी बनाया है। उम्मीदवारी के ऐलान के साथ सपा ने यहां जीत का दम भरना भी स्टार्ट कर दिया है। लेकिन बीजेपी की तरफ से मिल्कीपुर सीट की कमान खुद सीएम योगी ने संभाल रखी है। ऐसे में सपा के लिए राह आसान नहीं होगी।

बीजेपी को दिया खुला मैदान

दूसरी तरफ अजीत प्रसाद को टिक देना सपा के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। क्योंकि बीजेपी विपक्षी दलों को हमेशा ही परिवारवाद के आरोप लगाकर चुनावों में घेरती रही है। ऐसे में अवधेश प्रसाद के बेटे को टिकट देना एक तरह से बीजेपी को अटैक करने के लिए खुला मैदान देने जैसा होगा।

सपा के लिए ख़ुशखबरी

दूसरी तरफ सपा के लिए अच्छी ख़बर यह है कि लोकसभा चुनाव के दौरान नाराज चल रहे आनंदसेन यादव एक बार फिर से कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हुए हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो यहां समाजवादी पार्टी को फायदा होने के उम्मीद है और बीजेपी के लिए भी चुनावी पनघट से जीत की गगरी भरना मुश्किल होने वाला है।

IAS बनना चाहते थे रामनाथ कोविंद, UPSC पास करने के बाद भी टूटा सपना, कैसा रहा पूर्व राष्ट्रपति का सियासी सफर

PM मोदी-ट्रंप की फोन पर बात, भारत-अमेरिका रिश्तों को लेकर क्या हुई चर्चा?

हवा में चाकूबाजी, तेजी से नीचे आया विमान…कौन हैं भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार? जान पर खेलकर बचाई 180 की जान

यूपी पुलिस को ही भंग कर सभी केस CBI को देने पड़ेंगे क्या? सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

कांग्रेस की एकला चलो नीति पर भड़के उद्धव ठाकरे! INDIA गठबंधन की बैठक में सुनाई खरी-खोटी, दी ये सलाह