Supreme Court Hearing On DM Medha Roopam Case: सुप्रीम कोर्ट ने आज गौतम बुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम की याचिका पर सुनवाई की। डीएम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर की गई थी। जिसमें उत्तर प्रदेश में छात्र कार्यकर्ता अकृति चौधरी को NSA के तहत हिरासत को गलत ठहराया और आदेश दिया कि जिला मजिस्ट्रेट मेधा रूपम के वेतन से 5 लाख रुपये काटकर अकृति चौधरी को मुआवजा दिया जाए। उत्तर प्रदेश में छात्र कार्यकर्ता अकृति चौधरी को NSA के तहत हिरासत में लिया गया था।
डीएम मेधा रूपम ने हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट के जज एससी शर्मा और एनके सिंह ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा कि अगर हिरासत का आदेश कई अधिकारियों (SHO, DCP, कमिश्नर आदि) की रिपोर्ट और जांच के बाद निकला है, और इसमें 5 चरणों की प्रक्रिया अपनाई गई है,तो सिर्फ जिला मजिस्ट्रेट को अकेले दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि पूरा निर्णय लेने का सिलसिला ऊपर से नीचे तक कई लोगों से जुड़ा था, इसलिए सिर्फ DM पर 5 लाख रुपये का जुर्माना नहीं लगाया जा सकता। सरकार के वकीलों ने भी यही तर्क दिया कि DM ने अकेले फैसला नहीं लिया। कई स्तरों की जांच और NSA एडवाइजरी बोर्ड की मंजूरी के बाद ही आदेश जारी हुआ था। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। यानी अदालत अभी अंतिम फैसला नहीं सुनाई है।
अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए मजदूरों के आंदोलन के दौरान स्टूडेंट एक्टिविस्ट आकृति चौधरी को अरेस्ट किया गया था और बाद में उन पर एनएसए लगा दिया गया था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नोएडा में श्रमिकों के प्रदर्शन में कथित भूमिका को लेकर आकृति चौधरी पर NSA लगाए जाने के फैसले पर आपत्ति जताई थी। कोर्ट ने आकृति चौधरी की हिरासत को रद्द कर दिया गया था और DM की सैलरी से 5 लाख रुपये काटकर चौधरी को मुआवजे के तौर पर देने का आदेश दिया था। लोगों को अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार है।