मस्जिद कार्रवाई पर इकरा हसन सौजन्य-सोशल मीडिया
उत्तर प्रदेश

सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण से इकरा हसन भड़कीं, कोर्ट जाने का ऐलान, कहा- एक रात का भी वक्त नहीं दिया

Iqra Hasan Statement: सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण पर इकरा हसन ने कार्रवाई को तानाशाही बताया। सपा सांसद ने कहा कि मामले में कोर्ट जाकर कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।

प्रिया जैस

Iqra Hasan Saharanpur Mosque Demolition: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में कलेक्ट्रेट के अंदर बनी मस्जिद पर बुलडोजर की कार्रवाई के बाद सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन समेत कई नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है।

हाउस अरेस्ट के बाद समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने कहा, "कल शाम को मेरे घर के बाहर पुलिस तैनात कर दी गई और हमका रात में जाने से रोका गया। सहारनपुर में हमारे जितने भी पार्टी के लोग और नेता हैं, सभी लोगों का हाउस अरेस्ट किया गया है। एक फरमान जारी करके धार्मिक स्थल को तोड़ दिया गया है। सिर्फ राजनीतिक फायदों के लिए धर्मस्थल को तोड़ा जा रहा है?"

प्रदेश में 'क्विक जस्टिस' का प्रकरण

इकरा हसन ने कहा कि लखनऊ भी मेरी बात हुई है। हमने अखिलेश यादव और पार्टी के सभी लोगों को अवगत कराया है। इस मामले में कोई न कोई तरीका निकाला जा रहा था, लेकिन मोहलत ही नहीं दी गई। आजकल प्रदेश में 'क्विक जस्टिस' का प्रकरण चल रहा है।

एक आतंकी को भी मर्सी पीटिशन समेत कई मौके मिलते हैं। परसों एक फैसला आया और एक रात का वक्त नहीं दिया गया। यह 1947 से पहले की बनी मस्जिद है, प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट लागू होता है, वक्फ बाई यूजर लागू होता है। सब चीजों को दरकिनार कर दिया गया।

कार्रवाई के खिलाफ कोर्ट जाने का ऐलान

समाजवादी पार्टी सांसद ने कहा कि इस एक खास समुदाय के लोग प्रभावित होते, इसलिए उनके धार्मिक स्थल को जमीदोज कर दिया गया। यह तानाशाही है। हम इसके खिलाफ कोर्ट जाएंगे। जो फैसला आया है, वो मस्जिद को मद्देनजर रखते हुए नहीं आया है।

प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट मेंशन नहीं है और कानूनी दाव पेच में कुछ चीजें रह जाती हैं तो मौका दिया जाता है, यही देश का संविधान कहता है। अधिकारियों को भी सोचना चाहिए कि ऐसा करने से किस तरह से धार्मिक उन्माद फैलेगा।

सहारनपुर मस्जिद कार्रवाई

गौरतलब है कि कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर कुछ समय से विवाद चल रहा था। मिली जानकारी के अनुसार, 10 फरवरी 2025 को बजरंग दल के पूर्व क्षेत्रीय समन्वयक विकास त्यागी ने जिलाधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी एक अवैध संरचना है और कार्रवाई की मांग की।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि मस्जिद परिसर में बने कमरों और वहां स्थित पोस्ट ऑफिस से किराया वसूला जा रहा था। इसके बाद, जिलाधिकारी के निर्देश पर मामले की जांच की गई। प्रशासन का दावा है कि जांच में पुष्टि हुई कि यह संरचना वास्तव में सरकारी जमीन पर बनी थी।

सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती

इसके बाद, 24 मार्च 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में कार्रवाई की मांग करते हुए एक याचिका दायर की गई। 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद को अवैध संरचना घोषित कर दिया और इसे गिराने का आदेश दिया। साथ ही, कब्जा करने वालों से नुकसान के तौर पर ₹6.41 करोड़ वसूलने के निर्देश दिए गए और उन्हें आदेश का पालन करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया।

सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देते हुए, मस्जिद प्रबंधन ने 20 जुलाई को जिला अदालत का रुख किया। मामले की सुनवाई के बाद, जिला न्यायाधीश सतेन्द्र कुमार की अदालत ने 2 सितंबर को मस्जिद पक्ष की अपील खारिज कर दी और सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा।

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