अखिलेश यादव (सोर्स- सोशल मीडिया) 
उत्तर प्रदेश

इन 3 पैमानों पर खरे उतरे तो मिलेगा टिकट! UP चुनाव के लिए अखिलेश ने बनाया प्लान, आलोक रंजन कर रहे निगरानी

UP Assembly Election 2027: यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी ने उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया तेज कर दी है। बेहद गोपनीय तरीके से पर्सनालिटी सर्वे के माध्यम से उम्मीदवार का चयन होगा।

स्निग्धा श्रीवास्तव

SP Ticket Survey For UP Assembly Election 2027: समाजवादी पार्टी के लिए आगामी 2027 का विधानसभा चुनाव 'करो या मरो' की लड़ाई जैसा है, क्योंकि पार्टी दो बार से सत्ता से बाहर चल रही है। इस बार अखिलेश यादव 2024 के लोकसभा चुनाव वाले प्रदर्शन को दोहराने और बीजेपी को उत्तर प्रदेश में सत्ता से बेदखल करने के लिए बेहद संजीदा हैं। इसके लिए उन्होंने उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया काफी पहले से शुरू कर दी है।

पार्टी के भीतर इस समय बेहद गोपनीय तरीके से पर्सनालिटी सर्वे चलाया जा रहा है। इस सर्वे की खास बात यह है कि एजेंसियां किसी विशेष नेता के नाम पर नहीं, बल्कि विधानसभावार सबसे पॉपुलर चेहरों (चाहे वह समाज सेवी हो या किसी अन्य दल का) की रेटिंग निकाल रही हैं। जिसका स्कोर सबसे ऊपर होगा, उसे टिकट मिलने की संभावना सबसे प्रबल होगी।

रिटायर्ड IAS अधिकारी आलोक रंजन कर रहे निगरानी

इस पूरे अकादमिक और अंदरूनी सर्वे के काम को पार्टी के भीतर एक विशेष सेल देख रहा है। चर्चा है कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव और सीनियर रिटायर्ड IAS अधिकारी आलोक रंजन बैकएंड से इस पूरे सर्वे की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। इसके अलावा शो टाइम जैसी एजेंसियों को कई जिलों के मुद्दों, जमीनी हकीकत और पीडीए (PDA) फॉर्मूले को सूट करने वाले चेहरों को खोजने का काम सौंपा गया है।

आईपैक से तत्काल बनाई दूरी

वहीं उत्तर प्रदेश चुनाव में कभी समाजवादी पार्टी के रणनीतिक साझेदार के रूप में चर्चा में रही मशहूर चुनावी मैनेजमेंट एजेंसी 'आईपैक' (I-Pac) को लेकर भी बड़ा खुलासा हुआ है। दरअसल, एक समय अखिलेश यादव आईपैक के साथ मिलकर 2027 की चुनावी बिसात बिछाने की तैयारी में थे, लेकिन बीच में ही सपा को आईपैक से अपने सारे संबंध पूरी तरह तोड़ने पड़े। संबंध टूटने की मुख्य वजह पश्चिम बंगाल में आईपैक के ठिकानों पर छापा पड़ा था। बंगाल में हुई इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अखिलेश यादव ने किसी भी राजनीतिक विवाद या बदनामी से बचने के लिए आईपैक से तत्काल दूरी बना ली।

शो टाइम को दी जिम्मेदारी

आईपैक से नाता टूटने के बाद अखिलेश यादव ने चुनावी सर्वे और रणनीति का काम शो टाइम नामक एजेंसी को सौंप दिया है। शो टाइम के रणनीतिकार इस समय यूपी के कई जिलों में जमीन पर उतरकर मुद्दों की टोह ले रहे हैं और सपा के लिए जिताऊ उम्मीदवारों के नामों की सूची तैयार कर सीधे नेतृत्व को भेज रहे हैं।

लोकसभा चुनाव 2024 में 'इंडिया गठबंधन' की सफलता के बाद उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस के रिश्तों को लेकर भी कई कयास लगाए जा रहे हैं। 'आज का यूपी' के अंदरूनी विश्लेषण में यह बात साफ हुई है कि समाजवादी पार्टी 2027 में कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के पक्ष में तो है, लेकिन वह अपने इस साथी को लेकर अत्यधिक उत्साह दिखाने से बच रही है।

सपा के शीर्ष रणनीतिकारों का मानना है कि यदि कांग्रेस को लेकर ज्यादा ढिलाई बरती गई, तो वह चुनाव के समय सीटों के बंटवारे में बड़ा दबाव बना सकती है। इस बारगेनिंग से बचने के लिए अखिलेश यादव का प्लान बेहद स्पष्ट है। सपा अंदरूनी तौर पर कांग्रेस को 60 से 70 सीटों के बीच ही रोकने की तैयारी कर रही है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि बड़े भाई की भूमिका में रहते हुए समाजवादी पार्टी खुद अधिकांश सीटों पर लड़े ताकि सरकार बनाने की स्थिति में वह पूरी तरह आत्मनिर्भर रह सके।

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