Shambhupur Azamgarh Murder Case: शम्भूपुर हत्याकांड के बाद आजमगढ़ पुलिस ने मृतक परिवार की दो मासूम बच्चियों के पालन-पोषण, शिक्षा और भविष्य में सहयोग की जिम्मेदारी उठाने का निर्णय लिया है। एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने दोनों बच्चियों के लिए अपना एक माह का वेतन देने की घोषणा की है, जबकि जनपद के पुलिसकर्मी एक दिन का वेतन देंगे।
पुलिस के अनुसार, घटना के दौरान आरोपी अरविंद अपने तीन बच्चों को कमरे में बंद कर करीब सात घंटे तक रहा और उन्हें जान से मारने की धमकी देता रहा। पुलिस और परिजन लगातार उसे बच्चों को सुरक्षित बाहर भेजने के लिए समझाते रहे। इसी दौरान कमरे के भीतर से गोली चलने की आवाज सुनाई दी।
पुलिस के मुताबिक, बच्चों की जान को तत्काल खतरा देखते हुए एसएसपी डॉ. अनिल कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने दरवाजा तोड़कर कमरे में प्रवेश किया। वहां नौ वर्षीय शौर्य गोली लगने से घायल मिला। उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पुलिस के आधिकारिक पक्ष के अनुसार, शौर्य को गोली पुलिस की ओर से नहीं लगी थी। पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल की परिस्थितियों और अन्य साक्ष्यों का हवाला देते हुए दावा किया है कि शौर्य को उसके पिता अरविंद ने गोली मारी थी। पुलिस के अनुसार, रेस्क्यू की गई 11 वर्षीय परी ने भी अपने बयान में कहा है कि उसके पिता ने ही उसके भाई शौर्य को गोली मारी और बच्चों को जान से मारने की धमकी दी थी।
इसके बाद पुलिस ने अरविंद की ओर से पुलिस टीम पर फायरिंग किए जाने की बात कही है। पुलिस के मुताबिक, बच्चों की सुरक्षा और आत्मरक्षा में की गई जवाबी कार्रवाई में अरविंद घायल हुआ, जिसे अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना के दौरान पुलिस टीम ने 11 वर्षीय परी और छह माह की बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाला। पुलिस के अनुसार, परी की कोहनी के पास मामूली खरोंच आई है। अब दोनों बच्चियों के भविष्य को लेकर पुलिस ने आर्थिक सहायता का निर्णय लिया है। एसएसपी डॉ. अनिल कुमार अपना एक माह का वेतन देंगे, जबकि जनपद के पुलिसकर्मी एक दिन का वेतन बच्चियों के लिए देंगे।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस सहायता का उद्देश्य दोनों बच्चियों के पालन-पोषण, शिक्षा और भविष्य की जरूरतों में सहयोग करना है। मामले में फॉरेंसिक साक्ष्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।