Saharanpur Mosque Controversy: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में शनिवार को कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर बनी एक अवैध मस्जिद को SDM, सिटी मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की मौजूदगी में गिरा दिया गया। यह कार्रवाई सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने पिछले महीने इस मस्जिद को अवैध घोषित करते हुए इसे गिराने के आदेश पर की गई।
यूपी में सहारनपुर मे गिराई गई मस्जिद का मुद्दा गरमाया हुआ है। इस मामले पर समाजवादी पार्टी ने एक्शन लेते हुए प्रतिनिधिमंडल को वहां भेजने का ऐलान किया था। समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल रविवार को सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित 119 वर्ष पुरानी मस्जिद को गिराए जाने के मामले में जांच और तथ्य जुटाने के लिए पहुंचने वाला था।
हालांकि, अब पार्टी ने इसे सोमवार तक टाल दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर सपा का प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर पहुंचने वाला था।
अखिलेश यादव के प्रतिनिधिमंडल भेजे जाने को लेकर सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने तीखा हमला बोला। उन्होंने अपने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, "अखिलेश जी, क्या आप सहारनपुर जाकर अवैध बिल्डिंग के मलबे के सामने फातिहा पढ़ेंगे? क्या आप मसूद भाई के बयानों का समर्थन करेंगे? UP पूछ रहा है, बताएंगे नहीं?"
उन्होंने सीधा-सीधा कहा कि अखिलेश यादव के एक्शन का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि मस्जिद तो अब गिराई जा चुकी है और मलबा भी दूर फेंका जा चुका है। अब कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद की जगह समतल कर दी है। ऐसे में उनका कहन है कि क्या अखिलेश अब सहारनपुर जाकर मलबे के सामने जाकर फातिहा पढ़ेंगे? उन्होंने अखिलेश यादव से जवाबदेही की मांग की।
सहारनपुर कलेक्ट्रेट के अंदर कल जिस मस्जिद को गिराया गया था, उस जगह पर खुदाई के दौरान एक कुआं मिला है। एसडीएम सदर सुबोध कुमार ने बताया कि तकनीकी टीमें और संबंधित एजेंसियां इसकी जांच करेंगी ताकि इसके दायरे का पता लगाया जा सके और आगे की जानकारी दी जा सके। प्रशासन ने फिलहाल कुएं को लोहे की चादर से ढक दिया है और मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर बैरिकेडिंग कर दी गई है।
सपा की ओर से 16 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के घटनास्थल पर पहुंचने का कार्यक्रम घोषित किया गया था लेकिन बाद में इसे टाल दिया गया। अब प्रतिनिधिमंडल के सोमवार को मौके पर पहुंचने की बात कही जा रही है। इस पूरे मामले में अब कुएं की उम्र और उसकी ऐतिहासिक स्थिति को लेकर एएसआई की जांच अहम मानी जा रही है।
फिलहाल कुएं के मिलने को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पुरातात्विक जांच पूरी होने से पहले इसके इतिहास या किसी धार्मिक स्थल से इसके संबंध को लेकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।